लोकतंत्र क्या है ? अर्थ एवं परिभाषा | What is Democracy in Hindi

Published by Dakshya on

नमस्कार दोस्तों, आज हम चर्चा करने वाले हैं एक महत्वपूर्ण विषय what is Democracy in Hindi के बारे में जो राजनीतिक विज्ञान का एक महत्वपूर्ण विषय है। इस आर्टिकल में जानेंगे में लोकतंत्र क्या है , इसके बारे में पूर्ण रूप से आलोचना करेंगे। इसमें जानेंगे Democracy meaning in hindi

आधुनिक दुनिया की देशों में प्रचलित विभिन्न शासन व्यवस्था के बीच में गणतंत्र सबसे श्रेष्ठ और लोकप्रिय शासन व्यवस्था तथा सरकार है। राजतंत्र को पूर्ण विरोध करता है गणतंत्र शासन व्यवस्था। प्राचीन काल की प्रचलित अत्याचारी एवं निरंकुश राजतंत्र शासन व्यवस्था को पूर्ण रूप से विरोध करके आज गणतंत्र दुनिया की सबसे शक्तिशाली शासन व्यवस्था के रूप में परिचित है।

गणतंत्र एक लोकप्रिय शासन व्यवस्था है । प्राचीन ब्रिज नगर राज्यों से जन्म हुए यह शासन व्यवस्था को पृथ्वी की प्राया 90% देश अपनाए हुए हैं।

लोकतंत्र की जन्म कैसे हुआ?

लोकतंत्र की जन्म हुई है प्राचीन ग्रीक देश में । पहले ग्रीक के दो नगर राज्य Sparta और Athens में ये शासन व्यवस्था प्रचलित था। गणतंत्र (Democracy)  दो ग्रीक शब्दों Demos और  Kratos or Kratia  से मिलकर बनी है।

  • DemocaryDemos + Kratos or Kratia ( दो ग्रीक शब्द से लिया गया है)
  • Demos का अर्थ है लोग
  • Kratos  का अर्थ है क्षमता

इसलिए लोकतंत्र का अर्थ है लोग शक्ति अथवा लोग क्षमता (People’s Power) . एक ही वाक्य में कहे तो लोकतंत्र  लोक शक्ति के ऊपर आधारित एक शासन व्यवस्था है।

लोकतंत्र की अर्थ और परिभाषा (Democracy meaning in Hindi)

जनसाधारण के द्वारा परिचालित शासन व्यवस्था को लोकतंत्र कहा जाता है। लोकतंत्र लोगों ( नागरिक)  के द्वारा प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से चलाई जाने वाली एक शासन प्रणाली है। जो राजतंत्र शासन प्रणाली को पूर्ण विरोध करती है।

  • परिभाषा (Definition of Democracy)

राजनीतिक विद्वान लोग लोकतंत्र की विभिन्न डेफिनेशन दिए हैं। आइए जानते हैं उन विद्वानों के द्वारा दिया गया लोकतंत्र की परिभाषा

अब्राहम लिंकन – लोकतत्र  लोगों का लोगों के द्वारा और लोगों के लिए शासन है” ( Democracy is a government of the poeple, by the peole, and for the people.)

सिली (Seeley) – “लोकतंत्र एक ऐसी सरकार है जिसमें सबका हिस्सा है” (democracy is a government in which everyone has a share.)

ए.भी. डाइस – लोकतत्र इस तरह का सरकार जिसमें शासनकरता समग्र जनसंख्या की एक प्रधान अंत विशेष”। (Democracy is a form of government in which the Governing Body is a comparatively large fraction of  population.)

Lord Brayce –  “लोकतंत्र वह सरकार की ओर से होता है जिसमें राज्य की सत्ता मुख्य रूप से किसी विशेष वर्ग या वर्ग में नहीं बल्कि समग्र रूप से समुदाय के सदस्यों में निहित होती है”। (Democracy is that from of Government in which the rulling power of the state is largely rested not in any particular class or classes but in the members of the community as a whole)

गेटेल –  लोकतंत्र एक सरकार जिसमें राष्ट्र की सामग्री जनता संप्रभु क्षमता की अधिकारी होते हैं” (Democracy is that form of government in which the mass of the population possesses the right to shere in the exercise of the sovereign power.)

लोकतंत्र की मौलिक नीति ( Basic principles of Democracy)

  • इस शासन में देश की संप्रभु क्षमता जनता के हाथ में होता है।
  • संवैधानिक ऊपर आधारित शासन व्यवस्था
  • मुख्यतः इसमें राजनीतिक समानता और स्वतंत्रता दिया जाता है।
  • इसमें शासन संख्या गरिष्ठ लोगों की प्रतिनिधि के द्वारा परिचालित होता है।
  • गणतंत्र में राजनीतिक पार्टी की उपस्थिति होती है।
  • निर्वाचन माध्यम से सरकार गठन होता है।
  • शांतिपूर्ण और संविधानिक उपाय में सरकार परिवर्तन होता है।
  • Open वितर्क एवं आलोचना की जाती है।
  • Open Society

लोकतंत्र कितने प्रकार होती है. (Types of Democracy)

शासन व्यवस्था में जनता की प्रतिक तथा अप्रत्यक्ष रूप से आंसर ग्रहण को आधार करके लोकतंत्र को मुख्यतः दो भाग में बांटा गया है।

(1).  प्रत्यक्ष लोकतंत्र – प्रत्येक गणतंत्र को शुद्ध गणतंत्र है कहा जाता है।

(2).  अप्रत्यक्ष लोकतंत्र – अप्रत्यक्ष लोकतंत्र को प्रतिनिधिक लोकतंत्र भी कहा जाता है।

प्रत्यक्ष लोकतंत्र (Direct Democracy)

जो लोकतंत्र शासन व्यवस्था में जनता सीधे/ प्रत्यक्ष रूप से शासन परिचालना कार्यों में भाग लेते हैं, उसे कहते हैं प्रत्यक्ष लोकतंत्र।

इसमें देश की सारे नागरिक एक निर्दिष्ट जगह पर एकत्र होकर आईन बनाना, विभिन्न सरकारी पदवी के लिए निर्वाचन, आय व्यय की समीक्षा, विचार पति नियुक्ति और अलग-अलग शासन कार्य चलाते हैं। प्रत्यक्ष लोकतंत्र में  शासक गोष्टी को चुनने के लिए चुनाव की जरूरत नहीं पड़ती।

प्राचीन काल में ग्रीक देश के एथेंस नगर राज्य में प्रत्यक्ष लोकतंत्र शासन व्यवस्था प्रचलित था । प्रत्यक्ष गणतंत्र केवल कम जनसंख्या बाले देशों में ही संभव हो सकता है जनसंख्या बहुल देशों में प्रतिक गणतंत्र की संभावना नहीं की जा सकती।

भारत जैसे विशाल देशों के प्रत्यक्ष लोकतंत्र व्यवस्था प्रचलित होना संभव नहीं है। वर्तमान व्यवस्था केवल Switzerland में प्रचलित है। केवल Switzerland के कुछ छोटे-छोटे प्रदेश में ही  यह व्यवस्था प्रचलित है।

  • Demerits – प्रत्यक्ष लोकतंत्र अनेक राष्ट्र के लिए उपयोगी नहीं है। दरिद्र निरक्षर औरन उन्नत देश के लिए यह सफल नहीं हो सकता।

अप्रत्यक्ष लोकतंत्र (indirect Democracy)


जो लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में देश के प्रत्येक नागरिक सीधे रूप से भाग ना लेकर वह लोग अपने द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि के जरिए भाग लेते हैं, उसे ही अप्रत्यक्ष लोकतंत्र कहते हैं। अर्थात जनता सीधे शासन कार्य में भाग ना लेकर प्रतिनिधि चुनते हैं जो शासन कार्य में भाग लेते हैं ।

समझिए – अप्रत्यक्ष लोकतंत्र में नागरिक खुद शासन ना करके निर्वाचन के जरिए में प्रतिनिधि चुनते हैं और प्रतिनिधि के द्वारा शासित होते हैं। चुने गए प्रतिनिधि जनता के तरफ से शासन परिचालना करते हैं। वह प्रतिनिधि अपने शासन के लिए हमेशा जनता के आगे दाई रहते हैं।

आधुनिक देश की आयतन लोकसंख्या वृद्धि एवं शासन व्यवस्था की जटिलता के हेतु वर्तमान समय में प्रत्यक्ष लोकतंत्र व्यवस्था प्रचलित होना असंभव है। इसलिए पृथ्वी में जितने भी लोकतंत्र देश है वहां प्रत्यक्ष तथा प्रतिनिधिक लोकतंत्र दिखाई देती है।

अप्रत्यक्ष लोकतंत्र संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन, भारत जापान, आदि अनेक देश में दिखाई देती है।

  • Demerits – इसमें निर्वाचित प्रतिनिधि दायित्वहिन और आलसी होकर कार्य करते हैं। इसीलिए सही समय पर कार्य नहीं हो पाता।

लोकतंत्र की अच्छे गुण ( Merits of Democracy in Hindi)


नीचे दी गई अपने अच्छे गुणों के लिए लोकतंत्र दुनिया भर में लोकप्रिय शासन व्यवस्था है। तो चलिए जानते हैं लोकतंत्र की क्या क्या अच्छे गुण हैं।

• जनता का शासन – लोकतंत्र है लोगों की शासन। जनता की मंगल के लिए आवश्यक समस्त सुविधा प्रयोग प्रदान करना इस सरकार का लक्ष्य होता है। जन स्वार्थ विरोधी कार्य को यह सरकार बिल्कुल सहमत नहीं करती। लोगों की स्वार्थ को ध्यान में रखते हुए सरकार नीति और निष्पत्ति लेती है।

• राजनीतिक समानता – लोकतंत्र में व्यक्तिगत समानता प्रतिष्ठा के ऊपर अधिक गुरुत्व दिया जाता है। राजनैतिक, सामाजिक और अर्थनीति भेदभाव को दूर करके प्रत्येक क्षेत्र में समानता प्रतिष्ठा करना लोकतंत्र का लक्ष्य है। इसमें धनी- निर्धन, छोटे बड़े, शिक्षित अशिक्षित सभी के बीच में समानता स्थापन करता है।

• व्यक्ति स्वाधीनता और अधिकारों का सुरक्षा – व्यक्ति की व्यक्तित्व विकास के लिए अधिकार और स्वाधीनता नितांत आवश्यक है । लोकतंत्र देश में व्यक्ति अनेक अधिकार उपभोग करता है। स्वाधीन से अपने बातें कह सकता है संगठन कर सकता है इस तरह अनेक मौलिक अधिकार व्यक्ति को दिया जाता है। लोकतंत्र के बल अधिकार नहीं देता बल्कि उसकी सुरक्षा भी करता है इसके लिए बहुत सारे उचित व्यवस्था की जाती है।

• दक्ष, प्रगतिशील और मजबूत सरकार – लोकतंत्र शासन स्थाई दक्ष एवं प्रगतिशील है। सरकार जनता की मंगल के लिए प्रगतिशील कार्य करती है। शांति पूर्ण रुप से शासन कार्य परिचालना की जाती है।

• आत्म निर्भर – व्यक्ति को अपने पैर में खड़े होना और आत्मविश्वास भरना लोकतंत्र की लक्ष्य है।

• कानूनी शासन – लोकतंत्र में कानूनी शासन दिखाई देती है। जनता की मर्जी के ऊपर शासन निर्भर करता है। पदवी में रहने वाले कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा जनता के ऊपर थोप नहीं सकता। इसके द्वारा शासक अपनी इच्छा अनुसार शासन नहीं कर सकता।

• राजनीतिक शिक्षा प्रदान – लोकतंत्र शासन में जनता सरकार की विभिन्न कार्यों में शामिल होते हैं इसलिए वह यथेष्ट राजनीतिक शिक्षा और अनुभूति लाभ करते हैं। राजनीतिक शासन के बारे में बहुत कुछ शिक्षा प्राप्त करते हैं।

लोकतंत्र की दुर्गुण ( Demerits of Democracy in hindi)

आज दुनिया में लोकतंत्र को सर्वश्रेष्ठ शासन व्यवस्था कहने के बावजूद इसकी कुछ दोस्त, दुर्बलता दिखाई देती है।

• संख्या का प्राधान्य – लोकतंत्र में गुण अपेक्षा संख्या तथा परिमाण के ऊपर अधिक प्राधान्य दिया जाता है। किसी भी मत में जितनी भी खराबी हो संख्या गरिष्ठ के कारण उसे ग्रहण किया जाता है। इसमें संख्या गरिष्ठ मत कि शासन चलने हेतु अल्पसंख्यक लोगों की स्वार्थ को हनी पहुंचता है।

• अयोग्यता मतवाद – लोकतंत्र संख्या को प्राधान्य देता है। अधिकांश जनता अशिक्षित, अनजान एवं अयोग्य होते हैं इसलिए सटीक निष्पत्ति लेने में पीछे रह जाते हैं। इसलिए वह अपने त्रुटिपूर्ण निष्पत्ति को कार्यकारी कर देते हैं। इसलिए फारसी दर्शनी फुगो लोकतंत्र को अयोग्यता का मतवाद” कहे हैं।

दुर्नीति ग्रस्त शासन – लोकतंत्र शासन में देश के अधिकांश लोग भाग लेते के कारण वास्तव में किसी के ऊपर किसी भी नियंत्रण नहीं रहता। इसमें बारंबार निर्वाचन होते रहता है एवं इस निर्वाचन में भी पैसे बहुत खर्च होता है, शासक राजनेता अपनी-अपनी निर्वाचन खर्च के लिए दुर्नीति कार्य से पैसे संग्रह करते हैं। फल स्वरुप सरकार दुर्नीति ग्रस्त हो होता है।

अधिक खर्च – लोकतंत्र एक Expensive शासन व्यवस्था है इसमें बार-बार निर्वाचन कराने के कारण प्रतिनिधि और मंत्री लोगों की वेतन भत्ता और दैनिक गश्त खर्च होता है। इसमें भी परीक्षा के रूप में अनेक योजना कार्य कार्य किया जाता है। सस्ता लोकप्रियता के लिए भी सरकार बेवजह खर्च करता रहता है। इस तरह की एक Expensive शासन व्यवस्था गरीब देश के लिए उचित नहीं है।


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