लोकतंत्र कितने प्रकार है?- Type of Democracy in Hindi

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आधुनिक देशों में प्रचलित विभिन्न शासन व्यवस्था  में लोकतंत्र सबसे सर्वश्रेष्ठ एवं लोकप्रिय शासन व्यवस्था है। प्राचीन काल से प्रचलित अत्याचारी और निरंकुश राजतंत्र को पूर्ण विरोध करता है लोकतंत्र शासन व्यवस्था जो आज पूरे दुनिया को अपनी मायाजाल में बांधी हुई है।

पहले लोकतंत्र प्राचीन ग्रीक नगर राज्य में जन्म हुई थी, आज पूरे दुनिया में अपनी स्वतंत्र जगह स्थापित की है। लोकतंत्र शासन व्यवस्था को दुनिया के प्राय 90% देश अपनाए हुए हैं.  भारत भी इस में एक है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक राष्ट्र है।

लोकतंत्र क्या है?


लोकतंत्र के दोष शब्द से मिलकर बना  है “Demos” और “Kratos” जिसका अर्थ है लोग शासन तथा लोग क्षमता। लोकतंत्र को लेकर बहुत सारे विद्वान आपने डेफिनेशन दिए हैं।

अब्राहम लिंकन – ” लोकतंत्र  लोगों की, लोगों के द्वारा, लोगों के लिए शासन है।

ए.भी. डाइस – “गणतंत्र इस तरह का सरकार जिसमें शासनकरता समग्र जनसंख्या की एक प्रधान अंत विशेष”।

सिली (Seeley) – “लोकतंत्र एक ऐसी सरकार है जिसमें सबका हिस्सा है”

इसमें यह पता चलता है कि – लोगों के द्वारा परिचालित शासन व्यवस्था को ही कहते हैं लोकतंत्र शासन इसमें लोग प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लेते हैं।

लोकतंत्र कितने प्रकार है ? (Type of Democracy in Hindi)

दुनिया में प्रचलित शासन व्यवस्था के बीच लोकतंत्र सबसे लोकप्रिय है। इस लोकतंत्र शासन व्यवस्था दो प्रकार की होती है।

प्रत्यक्ष लोकतंत्र (Direct Democracy)

जो लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में नागरिक राष्ट्र की शासन परिचालना क्षेत्र में सीधी और सक्रिय रूप से अंश ग्रहण करते हैं उसे ही कहते हैं प्रत्यक्ष लोकतंत्र.

इसमें सीधे जनता अपने ऊपर शासन करते हैं। यहां नागरिक ही एकत्र होकर अपने लिए आइन कानून बनाते हैं और उसे कार्यकारी करने के लिए कार्यकर्ता सुनते है। इसको विशुद्ध लोकतंत्र भी कहते हैं.

पहले प्राचीन ग्रीक और रोमन अगर राज्य में इस प्रकार की लोकतंत्र शासन व्यवस्था प्रचलित था। वर्तमान के समय प्रत्यक्ष लोकतंत्र शासन व्यवस्था केवल स्विट्जरलैंड में ही प्रचलित है।

प्रत्यक्ष लोकतंत्र में तीन प्रकार के उपदान दिखाएं देते हैं वह है – Referendum , Initiative , Recall .

  • Referendum (मतसंग्रह) – प्रत्यक्ष लोकतंत्र में व्यवस्थापिका में बनाई गई इनको कार्य कार्य करने से पहले नागरिकों की मतदान लिया जाता है जिसे मतसंग्रह कहते हैं. इससे व्यवस्थापिका की  मनमानी नहीं चलती।
  • Initiative – इसके द्वारा नागरिक अपने जरूरत की आईन बना सकते हैं। अर्थात यदि व्यवस्थापिका कोई आए नहीं बनाता लेकिन इसी कानून नागरिक को जरूरत है तो वह चीठा प्रस्तुत करके व्यवस्था विधानसभा में स्थापित करते हैं। फिर उसके मुताबिक कानून बनाया जाता है।
  • Recall – प्रत्यक्ष लोकतंत्र में नागरिक अपने द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि को उस कार्य के लिए पद से हटा सकते हैं उसे ही कहते हैं प्रत्याहार . इसके द्वारा कार्यकाल समाप्त होने से पहले निर्वाचित प्रतिनिधि अपने कार्यों से बहिष्कृत होते हैं।

प्रत्यक्ष लोकतंत्र की अच्छाई (Merits)


1. इसमें लोगों के पास वास्तव में सार्वभौम क्षमता  होती है.


2. इसमें निर्वाचित प्रतिनिधि लोगों के सामने सर्वदा उत्तरदाई रहते हैं।


3. इसमें प्रचलित Recall सिस्टम के द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि अपने कार्यों को ईमानदार और अच्छे से करते हैं.


4. क्या व्यवस्था छोटे-छोटे देशों के लिए उपयोगी है.

प्रत्यक्ष लोकतंत्र की बुराई (Demerits)


1. विशालकाय देश के लिए यह व्यवस्था बिल्कुल उपयोगी नहीं है. अधिक जनसंख्या और विशाल आयतन वाले देशों के लिए अप्रत्यक्ष लोकतंत्र व्यवस्था उचित नहीं है.


2. Referendum और  Initiative के कारण आईन बनाने में विलंब होता है।

अप्रत्यक्ष लोकतंत्र (Indirect Democracy)


जो लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में नागरिक राष्ट्र परिचालन में सीधे रूप से अंश ग्रहण न करके उनके द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि के जरिए अंश ग्रहण करते हैं उसे ही कहते हैं अप्रत्यक्ष तथा प्रतिनिधि लोकतंत्र जो स्विजरलैंड में छोड़कर पूरी दुनिया में परिचालित है। कानून बनाने के लिए नागरिक प्रतिनिधि चुनते हैं जो व्यवस्थापिका में कानून बनाते हैं। इसमें निर्वाचित प्रतिनिधि अपने कार्य के लिए लोगों के निकट में उत्तरदाई रहते हैं ।

अप्रत्यक्ष लोकतंत्र की अच्छाई (Merits)

1. अप्रत्यक्ष लोकतंत्र बड़े देश हो या छोटे देश सभी के लिए उपयुक्त है।


2. इसमें लोगों के और निर्वाचित प्रतिनिधि के बीच सचिव संपर्क रक्षा संभव है.

अप्रत्यक्ष लोकतंत्र की बुराई (Demerits)

1. इसमें Recall सिस्टम नहीं होता इसलिए निर्वाचित प्रतिनिधि सर्वदा लोगों के मत अनुसार कार्य नहीं करते.


2. इसमें निर्वाचित प्रतिनिधि एवं सरकार कि अपनी मनमानी होने की संभावना अधिक होती है।


3. इसमें लोकप्रतिनिधी दायित्व है और आलसी होने की संभावना अधिक होती है.

भारत में किस प्रकार का लोकतंत्र है?

सवाल उठता है भारत में किस प्रकार लोकतंत्र प्रचलित है इसका जवाब है अप्रत्यक्ष लोकतंत्र – यहां लोग निर्वाचित प्रतिनिधि के जरिए शासन कार्य में शामिल होते हैं। नागरिक खुद अपने प्रतिनिधि को चुनते हैं और उनके द्वारा शासित होते हैं।

भारत एक विशालकाय आयतन वाला देश है और यहां की जनसंख्या पूरी दुनिया में दूसरी सबसे बड़ा आबादी वाला देश है इसलिए यहां प्रत्यक्ष लोकतंत्र व्यवस्था संभव नहीं है।


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