जे.जे. रूसो का सामाजिक समझौता सिद्धांत | Social Contract Theory in Hindi

Published by Dakshya on

Jean Jacques Rousseau एक मानव वादी दार्शनिक और गणतंत्र प्रेमी के रूप में जाने जाते हैं। अन्य दार्शनिक के जैसे वह फ्रांस की तत्कालीन परिस्थिति के द्वारा विशेष रूप से प्रभावित हुए थे। इसके अलावा Plato, Locke,  Hobbes  एवं Montesquie के द्वारा विशेष रूप से प्रभावित हुए थे।

जॉन लॉक के द्वारा प्रभावित होकर वह अपने सामान्य इच्छा(General Will) सिद्धांत दिए थे। इसके अलावा J.J. Rousseau Social Contract theory in Hindi भी दिए थे।

Rousseau’s Theory of state of Nature and Social Contract theory in Hindi.

नमस्कार मित्रों रूसो के सामाजिक समझौता के बारे में समझने से पहले आपको उनके दिए गए विचार प्रकृति अवस्था के बारे में जानना पड़ेगा। मैं अपने  तेरी के  से लिखूंगा आपको कोई परेशानी हो तो माफ कर दीजिएगा लेकिन समझ में आएगा जरूर।

राष्ट्र की उत्पत्ति कैसे हुआ इस बारे में तीन दार्शनिक अपना सामाजिक समझौता सिद्धांत दिए है । Thomas Hobbes, John Locke और J.J.Rousseau इन तीनों ने ही सामाजिक समझौता सिद्धांत के बारे में विशद रूप से उल्लेख किए हैं। तो चलिए आज हम जानेंगे जे. जे. रूसो के दिए गए सामाजिक समझौता सिद्धांत के बारे में।

State of Nature: प्राकृतिक अवस्था (प्राकृतिक राज्य)

राष्ट्र की उत्पत्ति से पहले लोग कैसे रहते थे, लोगों की व्यवहार कैसा था, एक दूसरे के प्रति उनके क्या-क्या मनोभाव था यानी कि मनुष्य की प्रवृत्ति के बारे में बताया गया है। मोटा मोटी रूप से देखा जाए तो राष्ट्र की उत्पत्ति से पहले मनुष्य कैसे रहता था उस बारे में J.J.Rousseau  बताए हैं ।

Thomas Hobbes एवं John locke के जैसे रूसो भी अपने दर्शन में प्रकृति अवस्था को वर्णन किए हैं। उनके प्रकृति अवस्था सिद्धांत में Locke and Hobbes चिंता धारा के बीच की समानता दिखाई देता है। यानी कि रूसो दोनों के थ्योरी को अध्ययन करके अपना एक थ्योरी बनाए हैं। प्रकृति राज्य के प्रारंभ में रूसो Locke के साथ सहमत होकर Hobbes के विरोध में अपनी राय दिए हैं।

• Hobbes के अनुसार प्रकृति अवस्था में कोई समाज नहीं था, कोई कानून नहीं था, कि कोई कानून बनाने वाला संस्था नहीं था। मनुष्य जीवन मैं अकेलापन, खालीपन ,गरीबी, वुरे आचरण, जानवर जैसी मनोभाव और क्षणस्थाई जीवन था ।  मनुष्य जानवर जैसी जीवन यापन करता था। प्राकृतिक राज्य में जोर जार मुलुक तार(might is right)  नीति चलता था ।

• प्रकृति राज्य में यानी कि प्राकृतिक अवस्था में जो जिसको अपना समझता था और उसको जोर जबरदस्त ले जाता था। बलशाली लोग दुर्बल लोगों को अत्याचार और शोषण करते थे। दुर्बल व्यक्ति भी अन्य लोगों के साथ मिलकर गुप्त रूप से बलशाली लोगों की आक्रमण को रोकते थे। राष्ट्र नहीं था, कानून नहीं था, कानून बनाने वाला संस्था नहीं था इसके कारण हत्या ,बल प्रयोग और हिंसा दिखाई दे रहा था। प्रकृति राज्य पूर्व सामाजिक और पूर्व राजनीतिक था।

• लेकिन जँन लँक के अनुसार प्रकृति अवस्था में मनुष्य अनुशासित , सुंदर और सुखमय जीवन यापन करता था। मनुष्य मनुष्य के बीच कोई शत्रुता नहीं था ना संघर्ष था । बोला जाए तो बंधुता और पारस्परिक सहयोग मनोभाव मनुष्य के अंदर दिखाई दे रहा था । मनुष्य विवेकी और विचारशील मनोभाव लेकर शांतिपूर्ण रूप से प्राकृतिक अवस्था में  जीवन यापन करता था।

• Rousseau के अनुसार प्रकृति अवस्था के प्रारंभ में मनुष्य स्वाधीन ,मुक्त, शांतिपूर्ण, और स्वयं संपूर्ण रूप में जीवन यापन करता था। उसका सामाजिक प्रवृत्ति नहीं था। वह Naturally, सरल,  निर्भय,  और सुखमय  जीवन यापन करता था । उसका ना परिवार ना संपत्ति था, अच्छे बुरे के बारे में कुछ धारणा नहीं था। उसका विचार शक्त नहीं था बल्कि खुद की स्वार्थ और दया मनोभाव था । उत्तेजना और उद्दीपना में वह बंधा हुआ था यानी कि उसके बस में था।

दूर सोचने की शक्ति नहीं था। वह अकेला और अबोध जीवन यापन करता था। उसकी बात करने की शक्ति नहीं थी। इसलिए प्राचीन मनुष्य भाषा, परस्पर के बीच में contact एवं अपनी मन की बात को किसी को बताना इन सारी चीजों  से वंचित थे । वह केबल अपनी शारीरिक इच्छा को पूर्ण करने के लिए ही कोशिश करता था। इस तरह से प्रकृति को मनुष्य जानवर जैसी जीवन यापन करता था जो कि केवल उत्तेजना और उद्दीपना के बस में था। उसका ना कोई परिवार था, ना संपत्ति था, ना कोई प्रतिष्ठान,  ना कोई समाज।

जे.जे. रूसो का सामाजिक समझौता सिद्धांत: Social Contract Theory

समय बीतने के साथ-साथ मनुष्य अपनी पहले की जीवन धारण शैली को परिवर्तन करके संगठित रूप में जीवन यापन करने लगा। मनुष्य के अंदर सृष्टि होने वाला सामाजिक प्रवृत्ति यानी कि अकेला जीवन धारण शैली को परित्याग करने के लिए मजबूर हुआ। वह गोष्टी बना कर जीवन यापन करने के लिए रहे प्रेरित हुआ। समय बीतने के साथ-साथ और संस्थानों सृष्टि होने लगा। पहले परिवार सृष्टि हुआ था। व्यक्ति अपने आप को प्रेम करने की प्रवृत्ति के कारण उसके अंदर अहंकार सृष्टि होने लगा एवं निजी संपत्ति धारणा उसके मन में आया। मनुष्य जो भी हासिल करो उसे अपनी व्यक्तिगत संपत्ति माना निजी संपत्ति के लिए दाबी  किया ।

प्रथम व्यक्ति जोकि एक इलाके को दावी करके अपनी निजी संपत्ति बोल के दावे किया एवं अन्य लोगों को प्रभावित किया । वह व्यक्ति ही सभ्य  समाज की संस्थापक  है ।

मनुष्य परिवार और व्यक्तिगत संपत्ति हासिल करने के बाद वह स्वार्थी  पर हो गया। अपनी संपत्ति की सुरक्षा और अधिक संपत्ति हासिल करने की लालच लेकर मनुष्य मनुष्य के बीच में लड़ाई झगड़े होने लगा लोगों के बीच शत्रुता सृष्टि होने लगा। यह शत्रुता से युद्ध, आक्रमण, और हत्या होने लगा

रूसो के अनुसार मनुष्य के अंदर संपत्ति प्रति अधिक लगाओ हिंसा भाव का कारण बना एवं व्यक्ति अपने पड़ोसी को भी हत्या करने में पीछे नहीं हटा। इस तरह से व्यक्तिगत संपत्ति समस्या सृष्टि हुआ एवं मनुष्य समाज धोनी और दरिद्र दो श्रेणी में बट गया। समग्र सामाजिक व्यवस्था अनुशासित हो गया था।

सामाजिक समस्या के वजह से मनुष्य अपने परिवार समाज पर व्यक्तिगत संपत्ति की सुरक्षा के लिए एक अनुष्ठान होने की आशा जताई। व्यक्ति परस्पर के अंदर सामाजिक समझौता करके राष्ट्र और सरकार बनाया।

मनुष्य परिवार और धन संपत्ति सुरक्षा के लिए जो अनुष्ठान किया था वह सामाजिक समझौता के द्वारा हुआ था। यह अनुष्ठान तथा राष्ट्र मनुष्य की स्वतंत्रता और स्वाधीनता सुरक्षा देने के लिए कानून बनाया । राष्ट्र के बंधन प्रत्येक मनुष्य एक सामाजिक समझौता के पक्षपात होकर खुद को एवं खुद की क्षमता तथा अधिकारों को एक सर्वशक्तिमान प्राधिकारी के पास अर्पण कर दी। जिसको J. J. Rousseau सामान्य इच्छा(General Will) बोलकर कहे है ।

Future :

निम्नलिखित देखेंगे रूसो के social Contract theory के अंदर क्या क्या विशेषता है।

1. सामाजिक समझौता के द्वारा मनुष्य अपनी सारी चीज समाज के पास समर्पण कर दिया लेकिन समाज के एक सभ्य के रूप में वह समाज से प्राप्त्य हासन करता है

2. इस सामाजिक समझौता के द्वारा व्यक्ति किसी निर्दिष्ट व्यक्ति के पास अपनी अधिकारों को समर्पण न करके समाज के पास समर्पण किया है। लेकिन वह इस समाज का एक अभिन्न अंग होने के कारण उसका कोई क्षति नहीं होता।

3. सामाजिक समझौता के द्वारा एक सबसे समाज, एक संगठित समाज सृष्टि होता है। यह समाज एक नैतिक संगठन है।

4. सामाजिक समझौता के द्वारा व्यक्ति के अंदर नैतिक(moral) और वस्तुबाद(material) कि परिवर्तन होता है।

राष्ट्रपति के विषय पर J.J.Rousseau के यह सामाजिक समझौता सिद्धांत पाश्चात्य राजनीतिक प्रतीक एक श्रेष्ठ अवदान थे ।

Categories: EDUCATION

0 Comments

Leave a Reply

Avatar placeholder

Your email address will not be published.