नुआखाई पश्चिम ओड़ीसा की एक महत्वपूर्ण त्यौहार | किस तरह मनाते हैं नुआखाई

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कर्मा व्यस्त जंजाल पूर्ण मनुष्य जीवन में सदा कालीन मनोरंजन के लिए त्योहारों विशेष रूप से अहम भूमिका निभाते हैं। यह हमारी सांस्कृतिक जीवन की एक पहचान है। कितनी निर्दिष्ट अंचल को लेकर विविध त्योहारों का नामकरण और पालन की रीती होती है।

ऐसी ही अनेक आदर्श और महत्व को लेकर पालन किया जाता है हमारा त्यौहार -“नुआखाई” । उड़ीसा के पश्चिमी इलाके के लोग अर्थात संबलपुर, सुंदरगढ़, बलांगीर, सोनपुर ,कालाहांडी , नूआपड़ा, और झाड़सुगुड़ा आदि जिले में यह विशिष्ट रूप से सार्वजनिक त्योहार के रूप में नुआखाई अनेक वर्षों से बनाया जा रहा है। ओडिशा के साथ-साथ बाहर के राज्यों मैं- छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश मैं रहने वाले ओड़िया लोग यह त्यौहार को आनंद और उल्लास से मनाती है हैं।

नुआखाई कब पालन किया जाता है?
ओडिशा में बारा महीने में तेरा त्यौहार पालन किया जाता है। प्रत्येक त्योहारों की तिथि, बार या नक्षेत्र एक निर्धारण समय होता है । लेकिन यह नुआखाई क्षेत्रों पर लागू नहीं होता । पहले राजा जमींदार और गांव के मुखिया इन सब लोग नवाखाई त्यौहार के दिन तय करके लोगों को बताते थे। इलाके के आधार पर यह त्यौहार अलग-अलग दिन में मनाया जाता था। पहले के समय से चंद्र गणना के अनुसार भद्रव शुक्लपक्ष के दिल मनाया जाता है। विशेष रूप से कहाजाए तो यहां नुआखाई गणेश चतुर्थी के अगले दिन पंचमी तिथि में मनाया जाता है।

उत्सव पालन

नुआखाई एक मेल-जोल का त्यौहार है। यह उत्सव पालन करने से पहले परिवार के लोग होते हैं घर लौट आते हैं। नुआखाई के दिन में परिवार के समस्त लोग घर में रहते हैं । इस दिन सब लोग नया पोशाक पहनते हैं। नए चावल से तैयारी भोजन और दाल अपने पूर्वजों और गांव के देवा देवी को समर्पण कर के घर के जस्ट व्यक्ति के साथ कनिष्ठ लोग प्रसाद सेवन करते हैं। चाषी अपने जमीन से उत्पादित धाम से चावल निकाल कर नए चावल की भैग (प्रसाद) तैयारी करता है । घर की मुखिया नए चावल की पहली भोजन अपने देवा देवी को अर्पण करते हैं। जिसके पास जमीन नहीं है वह अन्य लोगों के जमीन से धन की एक गुच्छा लाता है। उससे तैयारी प्रसाद को देवा देवी को अर्पण करता है।

नुआखाई के आदर्श और महत्व

वास्तव में नुआखाई एक महान सामाजिक परंपरा की एक प्रतीक है। सामाजिक जीवन को स्वस्थ और मजबूत करने के लिए इस त्यौहार का कितने निर्दिष्ट लक्ष्य रहा है। यह एक एकता का उत्सव है। इस त्यौहार में पारस्परिक झगड़े इर्षा हिंसा शत्रुता और   असहयोग जेसी मन की भावना को दूर करके सहयोगता तथा एकता के भाव को जागृत करता है। बड़े -छोटे के बीच स्नेहा भाग, लोगों के बीच में भक्ति प्रेम का आदान-प्रदान नुआखाई त्यौहार के द्वारा संभव होता है। गांव की मिट्टी के प्रति प्रेम भाव उसके महत्व इस त्यौहार सिखाता है।


डका हका

सामूहिक लोहाघाट त्यौहार एक दूसरे को मिलने जुलने के त्यौहार है। धनी- दरिद्र, शत्रु-मित्र, मालिक-श्रमिक ,राजा-प्रजा सब लोग मिलकर इस त्योहार को मनाते हैं। पश्चिम उड़ीसा में प्रत्येक घरों में, घर के बंधु अतिथि एक साथ होते हैं। देश विदेश में रहने वाले रिश्तेदारों को घर की मुखिया निमंत्रण करके लाते हैं। एकत्र नई अनाज का भोजन तथा प्रसाद का सेवन करते हैं।


घर की साफ सुथरा

नुआखाई त्यौहार के पहले से ही घर घर में साफ सुथरा किया जाता है। सभी घरों में लीपा पूछा, घर की पेंट आदि कार्य समाप्त कर दिए होते हैं। यहां तक की घर की सारे कपड़े, खुद के कपड़े साफ करने में महिलाएं कभी पीछे नहीं हटते। त्यौहार के पहले से ही घर के चारों तरफ साफ सुथरा परिवेश रखा जाता है।


खरीदारी

नुआखाई उत्सव के पहले से ही घर में रिश्तेदारों के आने का लक्ष्य लेकर और त्यौहार के उद्देश्य मी विभिन्न खरीदारी किया जाता है । यह खरीदारी पश्चिम ओडिशा लोगों की एक मुख्य आकर्षण है। यहां तक की नए कपड़े और आवश्यक पदार्थ खरीदा जाता है।


नया धान की संग्रह

नुआखाई से पहले नया धान की संग्रह करना एक महत्वपूर्ण विषय है। त्यौहार की मुख्य आकर्षण नया धान संग्रह करने के ऊपर ही निर्भर है। व्यक्ति विशेष उत्सव की पूजा के उद्देश्य में अपने जमीन से या बाजार खरीद कर यह नया धान लेकर आते हैं। नया धाम से चूड़ा चावल बाहर करके पूजा कार्य में लगाते हैं।


भेंट घाट

इस नुआखाई – प्रत्येक पड़ोसी, बंधु ,रिश्तेदारों के साथ मिलने की एक अवसर देता है जिससे एक दूसरे के बीच में स्नेह-श्रद्धा, प्रेम भाव और अनुकूल की आदत प्रदान होता है। यह नुआखाई के भेंट घाट नाम में परिचित है।

नुआखाई कृषि भीतिक एक महान त्यौहार है। कृषि के प्रति प्रतिबद्धता इस त्यौहार की मन की आवाज है। पश्चिम ओडिशा के लोगों के जीवन के साथ इस त्यौहार का बहुत ही घनिष्ट संपर्क है। समय बदलने के साथ साथ दूसरे त्योहारो के पालन विधि जैसे बदल रही है नुआखाई में भी परिवर्तन आ रही है। आधुनिक करण इसका मुख्य कारण । इसके अलावा भी पश्चिम उड़ीसा के सामाजिक परंपरा और संस्कृति वार्ता लेकर धार्मिक विश्वास के प्रतीक के रूप में नुआखाई को बहुत ही आनंद हर्ष उल्लास से मनाया जाता है ।

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