NTP क्या है ? परमाणु अप्रसार संधि | निरस्तीकरण क्या है?

Published by Dakshya on

पृथ्वी की स्वाधीन राष्ट्र , अपनी देश की सुरक्षा के नाम पर वह अपनी सामरिक शक्ति बढ़ाते आ रहे हैं। दुनिया के सारे देश ने ताकत बढ़ाने के लिए अस्त्र-शस्त्र की दौड़ लगा रहे हैं जिससे दुनिया में भय, असहायता और युद्ध की भयावहता दिखने की संभावना सृष्टि हो रही है।

अस्त्र-शस्त्र कि यह प्रतियोगिता, दुनिया को विनाश की तरफ आगे ला रही है। किसी दोनों देशों के बीच में युद्ध हुआ तो बिहार युद्ध पूरी दुनिया को प्रभावित करती है जिस से खतरा अर भी बढ़ता है।

हिरोशिमा और नागासाकी शहरों की विनाश की कहानी दुनिया के लोग जाने के बाद परमाणु बम के विरोध में विश्व अजंता आवाज उठाने लगे। इसी परमाणु विनाश को देखते हुए पृथ्वी की कुछ बुद्धिजीवी लोग समझ गए कि परमाणु बोमा की व्यवहार यदि नियंत्रित ना हुआ तो पूरी दुनिया के साथ समग्र मानव जाति एक दिन ध्वंस हो जाएगा।

निरस्तीकरण क्या है?

परमाणु युद्ध जैसी भयानक युद्ध फिर से ना हो इस बात को ध्यान में रखते हुए बहुत सारे देशों ने आगे आए, जल, स्थल, आकाश में परमाणु बम परीक्षण ना हो पाए इसलिए बहुत सारे राजीनामा साक्षर हुआ था।

समग्र दुनिया से अस्त्र-शस्त्र को सीमित करके उसकी विलुप्त के ऊपर गुरुत्व देता है निरस्तीकरण। दुनिया में निरस्तीकरण को बनाए रखने के लिए बहुत सारे प्रयास किए जा रहे हैं उनमें से एक है एनटीपी संधि जिसके बारे में हम नीचे पूरी डिटेल में आलोचना करेंगे।

NPT क्या है?

द्वितीय विश्वयुद्ध की भयानक दृश्य को देखकर संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रतिष्ठा हुई थी तब से संयुक्त राष्ट्र संघ निरस्तीकरण के ऊपर जोर देते आ रहा है। अस्त्र शस्त्र नियंत्रण के लिए UNO की संविधान मैं उल्लेख किया गया है। निरस्तीकरण के लिए यूएन बहुत सारे उद्योग करते आ रहा है। उनमें से एक है एनबीटी (परमाणु अस्त्र अप्रसार संधि) इसके अलावा और बहुत सारे उद्योग किए गए हैं।

परमाणु अप्रसार संधि जहां की साधारण भाषा में कहा जाता है NTP ( Non-Prolification Treaty) जिससे पहले अमेरिका एवं रूस मिलकर प्रस्तुत किए थे। 1968 जुलाई के महीने में लंदन, मॉस्को एवं वाशिंगटन उपस्थापित किया गया था फिर 1970 मार्च 5 तारीख के दिन कार्यकारी किया गया।

इस संधि के ऊपर वोट लेने के समय दुनिया के 21 देश अनुपस्थित थे। इस संधि के समक्ष में 95 देश वोट दिए थे। फिर 1970 में इसको कार्यकारी किया गया था।

परमाणु अप्रसार संधि की उद्देश है परमाणु शक्ति विहीन देशों को सदा सर्वदा परमाणु शक्ति बिहीन करके रखना। अर्थात परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के साथ-साथ परमाणु परीक्षण पर अंकुश लगाना है। जुलाई 1968 से इस संधि पर हस्ताक्षर शुरू हुआ और आज इस संधि में दुनिया के 190 देश हस्ताक्षर कर चुके हैं।

इस संधि में यह दर्शाया गया था कि परमाणु संपन्न देश दूसरे परमाणु बिहीन देशों को परमाणु अस्त्र शास्त्र तथा उससे जुड़ी हुई कोई भी टेक्नोलॉजी प्रदान नहीं कर सकते। परमाणु विहीन देश के ऊपर परमाणु बम बनाने और परीक्षण करने के ऊपर रोक लगाया गया है। लेकिन परमाणु संपन्न देश के ऊपर इस संधि कुछ भी अंकुश नहीं लगाया है।

परमाणु संपन्न देश के ऊपर कुछ भी अंकुश ना लगाने के कारण परमाणु अप्रसार संधि में हस्ताक्षर न करने वाले देश इसे एक ‘नकारात्मक संधि’ भी कहते हैं। इसी कारण से भारत इस संधि से बाहर है।

परमाणु अप्रसार संधि की समालोचना

1. इस संधि अंतरराष्ट्रीय राजनीति के स्तर पर निरस्तीकरण किंबा शस्त्र नियंत्रण, जेसी किसी भी प्राप्ति के लिए सहयोग हो नहीं सकता

2. यह एक पक्षपात संधि क्योंकि परमाणु अस्त्र बिहीन देश की तुलना में परमाणु शस्त्र संपन्न देश ऊपर के स्थिति में रहते हैं इस प्रकार इस संधि को बनाया गया है।

3. यह परमाणु तथा परमाणु बिहीन देशों के बीच शक्ति तथा क्षमता की अंतर को दिखाती है और अन्याय को न्याय की तरह दिखाने की अय्याश करती है।


4. परमाणु अप्रसार संधि(NTP)  वास्तव में एक इस प्रकार राजनीतिक उपकरण है जो देशों को परमाणु संपन्न एवं परमाणु विहीन देशों में बांट देता है।

5. फ्रांस एवं तीन बार बार परमाणु परीक्षण करके  संधि कि नियम के खिलाफ जा रहे हैं परंतु इनके विरोध में कुछ भी कार्यवाही नहीं किया जा रहा है। इसमें इस संधि की विफलता को दर्शाता है।

ऐसे दोस्तों एनटीपी के बारे में कुछ जानकारी जिससे आपको जरूर पता होना चाहिए, इस संधि से जुड़े हुए और भी अपडेट हम आगे देते रहेंगे। यदि आपको परमाणु अप्रसार संधि के बारे में और कुछ पता है तो जरूर कमेंट कर कर बताइएगा हम आपकी विचारों को सम्मान के साथ स्वागत करते हैं।


0 Comments

Leave a Reply

Avatar placeholder

Your email address will not be published.