JOHN LOCKE SOCIAL CONTRACT THEORY IN HINDI | जॉन लॉक के सामाजिक समझौता सिद्धांत

Published by Dakshya on

 यह लेख में हम जॉन लॉक की State of Nature के बारे में जानेंगे  Locke के अनुसार प्रकृति अवस्था में लोग कैसे थे और जॉन लॉक की Social Contract theory  के बारे में भी जानेंगे और तुलना करेंगे Thomas Hobbes के सामाजिक समझौता के ऊपर देखेंगे दोनों के बीच में क्या-क्या अंतर Social Contract theory को लेकर।

इंग्लैंड के दार्शनिक जॉन लॉक एक उदारवादी दार्शनिक और ब्रिटिश संविधानिक राज्यतंत्र एवं संसदीय शासन व्यवस्था के जनक के रूप में परिचित है। इंग्लैंड मेें सन 1688 में Glorious revolutuon के कारण उनके दर्शन को विशेष रूप में प्रभावित किया था। Thomas Hobbes के जैसे john Locke भी Human nature को लेकर नकारात्मक विचार दिए थे। संविधानिक सरकार(Constitutional Govt.) के ऊपर जॉन लॉक बेस गुरुत्व देते थे।

State of Nature of john locke: प्रकृति अवस्था( प्रकृति राज्य)

Thomas Hobbes के जैसे जॉन लॉक भी अपने राजनीतिक दर्शन की शुरुआत प्राकृतिक राज्य से ही आरंभ की थी। जॉन लॉक Thomas Hobbes के बात पर agree थे की सभ्य समाज से पहले मनुष्य प्रकृति राज्य में रहता था। लेकिन प्रकृति राज्य के विषय में जॉन लॉक की चिंता धारा Thomas Hobbes के चिंता धारा से अलग है।


Thomas Hobbes की प्रकृति राज्य एक पूर्व-सामाजिक व्यवस्था के विषय में सूचना देता है लेकिन जॉन लॉक की प्रकृति राज्य एक पूर्व-राजनीतिक अवस्था के बारे में सूचना देता है। Thomas Hobbes के प्रकृति राज्य मैं मनुष्य जानवर जैसी जीवन यापन करता था। कोई कानून नहीं था जोर जर मुलुक तर यह नीति चलता था। व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए, power के लिए मनुष्य मनुष्य के बीच में संघर्ष चल रहा था।


लेकिन जॉन लॉके अनुसार प्रकृति राज्य में मनुष्य Discipline, सुंदर और सुखमय जीवन यापन करता था। मनुष्य मनुष्य के बीच में कोई शत्रुता नहीं था, कोई संघर्ष नहीं था। बंधुता और पारस्परिक सहयोग मनोभाव मनुष्य के बीच में दिखाई दे रहा था। मनुष्य की चिंता शक्ति और विचार शक्ति होता था इसलिए वह शांतिपूर्ण रूप से प्रकृति राज्य में जीवन यापन करता था।


लेकिन जॉन लॉक के अनुसार प्रकृति राज्य में कुछ कुछ असुविधा था – 

  • कानून बनाने वाली संस्था की अनुपस्थिति(Absence of recognised law making authority)

  • आईन को कार्यकारी करने के लिए कर्मचारी की अनुपस्थिति(Absence of any authority to execute the law)

  • आईन को व्याख्या करने के लिए कर्म करता की अनुपस्थिति(Absence of any authority to implement law)

इन सारी असुविधा को दूर करने के लिए मनुष्य अन्य लोगों के साथ सामाजिक समझौता(Social Contract)क्या।

सामाजिक समझौता सिद्धांत: Social Contract Theory in hindi

प्रकृति राज्य में मनुष्य सुखमय और शांतिपूर्ण जीवन यापन करता था। तो सवाल उठता है कि मनीष यदि प्रकृति राज्य में सुख शांति से रहता था फिर प्रकृति राज्य में यह सुख शांति को परित्याग करके भविष्य मे वह सामाजिक समझौता करने के लिए क्यों इच्छा जताई थी ?


Ans- ऊपर लिखा गया  असुविधा दूर करने के कारण और जॉन लॉक के अनुसार मनुष्य जीवन का अधिकार , स्वतंत्रता का अधिकार, और संपत्ति का अधिकार के सुरक्षा के लिए वह अन्य लोगों के साथ यह सामाजिक समझौता करा था। जॉन लॉक दो तरह के सामाजिक समझौता के बारे में कहे  हैं। पहला समझौता है सामाजिक जोकि मनुष्य एक दूसरे के बीच में किए थे।


द्वितीय समझौता सरकार और सभ्य समाज के बीच में हुआ था। Thomas Hobbes के सामाजिक समझौता में शासक  के तरफ झुका हुआ नहीं था। लेकिन जॉन लॉक के सामाजिक समझौता में सरकार इस समझौता के पक्षपात  है।


Thomas Hobbes के सामाजिक समझौता में मनुष्यों के अधिकार एक व्यक्ति यार एक निर्दिष्ट गोष्टी के हाथ में समर्पण किया गया था। लेकिन जॉन लॉक के सामाजिक समझौता में मनुष्य अपनी शासन करने की अधिकार को कोई व्यक्ति या गोष्ठी के हाथ में अर्पण नहीं करके समग्र मनुष्य संप्रदाय के हाथ में अर्पण किए है । जॉन लॉक के अनुसार समझौता द्वारा मनुष्य आईन को व्याख्या करना, कार्यकारी करना और उचित अनुचित या न्याय विचार करना, इन सारी अधिकारों को सरकार को अर्पण किए है। लेकिन यह अधिकारों को छोड़कर अन्य सारी प्राकृतिक अधिकार को व्यक्ति अपने पास रखा।
जॉन लॉक कि सामाजिक समझौता में समग्र मानव  संप्रदाय अर्थात राष्ट्र के पास क्षमता अर्पण किया गया है। शासक को प्राकृतिक कानून को कार्यकारी करने का और व्याख्या करने का क्षमता अर्पण  किया है। लेकिन शासक की पावर प्राकृतिक आईन तक ही सीमित है।


व्यक्ति की जीवन, स्वाधीनता और धन संपत्ति की रक्षा करने का कर्तव्य शासक के ऊपर है। जनसाधारण के मंगल के लिए उनकी इच्छा अनुसार सरकार का गठन हुआ है। यदि सरकार व्यक्ति की स्वार्थ साधन करने में विफल हो जाए तब जिस उद्देश में यह सरकार गठन हुआ था वह उद्देश्य साधन ना होने के कारण व्यक्ति विशेष सरकार को प्रतिरोध कर सकते हैं। 


Thomas Hobbes के अनुसार सर्वशक्तिमान प्राधिकारी( शासक) के निर्देश ही कानून है। यह कानून की अवमानना करने का अर्थात है प्रकृति राज्यों में वही भयंकर परिस्थिति में फिर से लौट जाना । लेकिन जॉन लॉक की सामाजिक समझौता अपरिवर्तनीय है। एक बार समझौता करने के बाद मनुष्य फिर से प्रकृति राज्य में वापस नहीं जा सकता।

Categories: EDUCATION

0 Comments

Leave a Reply

Avatar placeholder

Your email address will not be published.