जॉन लॉक का जीवन दर्शन | John Locke Biography In Hindi –

Published by Dakshya on

 हेलो दोस्तों आज हम जानेंगे उदारवाद का प्रवक्तामाने जाने वाले John Locke  Biography in Hindi  के बारे में। जॉन लॉक उदारवाद का प्रवक्ता क्योंं कहा जाता है यह लेख मेंं जानेंगे। उनके लिखी गई यह पुस्तक The Two Treatises of Government बारे में संक्षिप्त आलोचना करेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं जॉन लॉके जीवन परिचय।

जॉन लॉक की जीवन परिचय

जॉन लॉक एक इंग्लिश फिलोसोफर है जो 29 अगस्त 1632 को इंग्लैंड के समरसेट में प्यूरिटन माता-पिता के घर जन्मे थे, जॉन लोके के पिता एक प्रमुख देश के वकील थे और उनकी माँ एग्नेस कीने थीं। जॉन लॉक एक उदारवादी दार्शनिक और ब्रिटिश संविधानिक राजतंत्र एवं संसदीय शासन व्यवस्था का जनक के रूप में जाने जाते हैं। 

जॉन लॉक की संक्षिप्त जीवनी

जन्म29 अगस्त 1632
जन्म स्थानसमरसेट, इंग्लैंड
संप्रदायPuriton
स्कूलWestminster School
उच्च शिक्षाऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी
शिक्षाBA. 1656, Ma 1658
पेशाडॉक्टर
मृत्यु28 अक्टूबर 1704
John Locke Bio

इंग्लैंड की तत्कालीन राजनीतिक परिस्थिति को छोड़ दे तो जॉन लॉक अपने समय के दार्शनिकों के चिंता धारा द्वारा विशेष रूप से प्रभावित हुए थे। विशेष रुप से Thomas Hobbes के चिंता धारा से खूब प्रभावित हुए थे।

जॉन लॉक  जब 10 साल के थे तब (1642)  इंग्लैंड में ग्रह युद्ध शुरू हो गया था । यह युद्ध मत अधिकार को लेकर दो पक्षों राज पक्ष एवं प्रजा पक्ष (संसद) के बीच में चल रहा था। Puritan संप्रदाय के लोग प्रजा पक्ष के समर्थन में थे यानी कि जान लौट के परिवार संसद के तरफ से खड़े थे। इस युद्ध में लड़ने के लिए जॉन लॉक के पिता भी अंश ग्रहण किए थे।

गृहयुद्ध लगातार 10 वर्ष तक चलता है जिसमें प्रजा पक्ष विजई होते हैं। उस समय इंग्लैंड में स्टुअर्ट राजवंश के शासन चलता था, हार के बाद यह राजवंश को इंग्लैंड से निर्वासित कर दिया गया और उस समय की तत्कालीन राजा चार्ल्स प्रथम को मृत्युदंड दिया गया था.
ओलिवर क्रॉमवेल (Oliver Cromwell) के नेतृत्व में प्रजा पक्ष विजई हुआ था। इसके बाद इंग्लैंड में पहली बार राजतंत्र को हटाकर 1648 में गणतंत्र की स्थापना की गई थी।


जॉन लॉक की प्रारंभिक शिक्षा इस गृह युद्ध के समय ही घर में शुरू होकर समाप्त हो गई थी फिर 15 साल की उम्र में वह Westminster School मैं अपना दाखिला लेते हैं। वहां से उनकी आगे की पढ़ाई चली।


जॉन लॉक उच्च शिक्षा के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिए थे, वहां वह 1656 में BA की डिग्री हासिल की। इसके बाद जॉन लॉक अपना कार्य ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में ही शुरू की वहां वह Greek & Rhetoric विषय पढ़ाने लगे। लेकिन जॉन लॉक को पढ़ाने में इतनी रुचि नहीं थी, वह कुछ और करना चाहते थे इसलिए वहां ही Oxford University m.a. की पढ़ाई शुरू की, सन 1658 में m.a. की डिग्री हासिल की और एक डॉक्टर बन गए . 


जॉन लॉक की मुलाकात Lord Ashley  के साथ होती है। उस समय इंग्लैंड के बहुत बड़े पॉलीटिशियन थे Lord Ashley वह जॉन्लॉक को अपनी निजी चिकित्सक एवं विश्वासपात्र सचिव के रूप में नियुक्ति कीए . 1667 से वे एशली के लंदन स्थित निवासस्थान एक्सेटर हाउस में रहने लगे , 15 साल तक वह काम करते रहे उस समय उन्हें काफी चीज़े सीखने को मिला था। और वह राजनीतिक कार्यों में शामिल हुए थे।


थोड़े पीछे चलते हैं- साल 1658 में Oliver Cromwell की मृत्यु हो गई इसके बाद चार्ल्स प्रथम के जो उत्तराधिकारी थे यानी कि उनके पुत्र चार्ल्स द्वितीय (Charles 2nd) वह वापस इंग्लैंड आ गए और इंग्लैंड में फिर से अपनी आधिपत्य जमा कर इंग्लैंड से गणतंत्र को हटाकर राजतंत्र स्थापित कर देते हैं। इंग्लैंड में फिर से 1660 में राजतंत्र शासन शुरू हो गया ।  12 साल तक गणतंत्र शासन चलने के बाद फिर से इंग्लैंड में राजतंत्र आ गया था।

उस समय राजा काफी निरंकुश थे । जॉन लॉक तत्कालीन परिस्थिति को देखकर 1670 में एक पुस्तक लिखे थे The Two Treatises of Government जिसमें सरकार के बारे में बताएं गई थी, एक शासन व्यवस्था कैसा होना चाहिए उस बारे में बताए गए थे। लेकिन जॉन्लॉक ने इस पुस्तक को पब्लिश नहीं किया था कारण था उस समय का राजतंत्र शासन।


राजा के खिलाफ कोई आवाज उठाता था तो उससे वह मरवा देते थे। एक बार फिलोसोफर सिडनी ने राजा के  खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें  मृत्युदंड दिया गया था । इस वजह से जॉन लॉक अपने किताब को पब्लिक नहीं किए थे । उस समय इंग्लैंड की परिस्थिति बहुत खराब हो गई थी इसलिए वह हॉलैंड भाग गए थे । 

जॉन लॉक की जीवनकाल में ग्लोरियस रिवॉल्यूशन की प्रभाव

1688 में इंग्लैंड में ग्लोरियस रिवॉल्यूशन हुआ तब जाकर यह किताब पब्लिश करने के लिए सोचे थे और 1690 में इस किताब को पब्लिक किया गया था।  जॉन लॉक की लिखी गई टू द ट्रीटाइज ऑफ गवर्नमेंट उनके जीवन का सबसे बेहतरीन किताब था। इंग्लैंड की रक्तहीन गौरवमई क्रांति से जॉन लॉक की जीवन में काफी प्रभाव पढ़ा था। 


अब ग्लोरियस रिवॉल्यूशन क्या है- यहां एक इंग्लैंड में घटित धार्मिक और राजनीतिक क्रांति थी जिसमें इंग्लैंड का राजा बदली, शासन व्यवस्था बदली लेकिन कोई खून खराबा नहीं हुआ था इसलिए इसे रक्तहीन क्रांति ही कहते हैं। राजा जेम्स द्वितीय को अपनी पत्नी ऐनी समेत अपने निरकुंश शासन  को संसद के हवाले करना पड़ा था। इस क्रांति के बजे से इंग्लैंड निरंकुश शासन समाप्त हुआ था। फिर हालैंड से विलियम को बुलाकर इंग्लैंड का राजा बना दिया गया था। इसके बाद ही जॉन लॉक ने अपने किताब पब्लिश की थी। लगभग किताब लिखने के 20 साल बाद पब्लिश करवाई थी।


1689 में जॉन लॉक हॉलैंड से इंग्लैंड लौट रहे थे उस यात्रा में बोलियम की पत्नी रानी मेरी भी यात्रा कर रही थी । इंग्लैंड के राजा विलियम के साथ खास बंधुता  होने के कारण होने के कारण उन्हें इंग्लैंड का राजदूत होने के लिए प्रस्ताव दिया गया था लेकिन वह प्रस्ताव ग्रहण नहीं किए थे। अपना अंतिम जीवन इंग्लैंड में ही बिताना चाहते थे।

जॉन लॉक के शेष जीवन

जॉन लॉक सन् 1691 में  सर फ्रांसिस मेहाम के ग्राम्य निवासस्थान में रहने लगे। वह अपने जीवन काल में बहुत सारे पुस्तक लिखे और कुछ कविता भी  लिखी । जॉन लॉक बीमार होने लगे।  यहाँ पर 14 वर्ष तक वे उस शांत वातावरण में रहे जो उनके गिरती स्वास्थ्य के लिए आवश्यक भी था। 


वहां राजदूत होने के लिए मना कर दिए थे लेकिन 1696 में वे व्यापार आयुक्त नियुक्त हुए। उनके स्वास्थ्य गिरने लगी थी।  स्वास्थ्य ठीक न रहने के कारण 1700 में इस पद को भी छोड़ना पड़ा था । अपनी जीवनसंध्या धार्मिक अध्ययन एवं साधना में बिताते हुए 28 अक्टूबर 1704 को उनकी मृत्यु हो गई।

आशा करता हूं आपको जॉन लॉक के बारे में, उनके  जीवनी के बारे में कुछ जानने को मिला होगा। यह आर्टिकल आपको कुछ जानकारी प्रदान कर पाए तो हम दिल से खुश है। यदि आप भी जॉन लॉक के जीवन से जुड़े हुए कुछ बातें जानते हैं तो हमारे कमेंट सेक्शन आपके लिए हमेशा खुले हैं .


0 Comments

Leave a Reply

Avatar placeholder

Your email address will not be published.