संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की भूमिका | INDIA’S POSITION IN UNO

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INDIA’S Role/Position IN UNO : संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की स्थीती/ भूमिका

हेलो दोस्तों My हिंदी जानकारी में आप सबका स्वागत है । आज हम जानेंगे संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की अभी तक क्या भूमिका रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ का उद्देश्य दुनिया में  शांति बनाए रखना और इन उद्देश को हासिल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ को भारत क्या-क्या सहायता अभी तक दीया है इस विषय में आज हम जानेंगे। संयुक्त राष्ट्र संघ के अंदर विश्व शांति प्रतिष्ठा के लिए भारत का क्या-क्या योगदान, क्या-क्या भूमिका रहा है यह जानेंगे।

संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत कब शामिल हुआ ?

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद दुनिया में शांति रक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ बनाया गया था। संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रतिष्ठित सदस्यों के बीच में भारत अन्यतम। साल 1942 जनवरी 1 तारीख , वाशिंगटन में आयोजित संयुक्त राष्ट्र संघ घोषणा पत्र में भारत तरफ से गिरिजा शंकर बाजपेई साक्षर किए थे । अंतरराष्ट्रीय संगठन प्रतिष्ठा के लिए साल 1945 अप्रैल 25 तारीख में आयोजित सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन में भारत अंश ग्रहण किया था। इसमें भारत की प्रतिनिधि दल नेतृत्व लिए थे  रामस्वामी मुदलियार। भारत की तरफ से संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिकार पत्र पर सिग्नेचर किए थे।

संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की भूमिका/ तिथि ।

संयुक्त राष्ट्र संघ गठित होने के दिन से भारत इसके साथ अति घनिष्ठ रूप से जुड़ते आ रहा है। देश की स्वाधीनता के बाद भारत सर्वदा संयुक्त राष्ट्र संघ की नीति और आदर्श को सम्मान देने के साथ उसकी निष्पत्ति को भी सम्मान प्रदर्शन करता आ रहा है। विभिन्न  अंतरराष्ट्रीय समस्या समाधान करने की दिशा में भारत संयुक्त राष्ट्र को सहायता और सहयोग करता आ रहा है।

आर्थिक सहायता प्रदान

किसी भी संस्था तथा अनुष्ठान को चलाने के लिए पैसा की  जरूरत होती है। इस तरह संयुक्त राष्ट्र संघ को अच्छे से चलाने के लिए काफी पैसे की जरूरत होती है। आर्थिक जरूरत को पूरा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ बहुत सारे देशों से आर्थिक सहायता लेती है।


एक सदस्य देश के हिसाब से भारत संयुक्त राष्ट्र संघ को आर्थिक सहायता देता है। संयुक्त राष्ट्र संघ को आर्थिक सहायता देने में भारत कभी विफल नहीं हुआ। केवल यही नहीं संयुक्त राष्ट्र संघ के लक्ष्य और उद्देश्य साधन करने के दिशा में भारत सहायता करता आ रहा है। अमेरिका अन्य विकसित देश जिस तरह से आर्थिक सहायता देते हैं भारत उस तरह से नहीं दे पाता लेकिन जो भी देता है काफी महत्वपूर्ण रखता है हमारे भारत देश के लिए और संयुक्त राष्ट्र के लिए। इस तरह अन्य भी देश है जो संयुक्त राष्ट्र संघ को आर्थिक सहायता प्रदान करने में सक्षम नहीं होते । आर्थिक सहायता दृष्टिकोण से संयुक्त राष्ट्र संघ किसी देश को जोर नहीं देता ना भेदभाव रखता है यानी कि वह देश ज्यादा आर्थिक सहायता करता है उसकी तरफ रहना चाहिए वह देश कम पैसा देता है उसकी तरफ कम नजर देना चाहिए ऐसा जवाब नहीं होता।


संयुक्त राष्ट्र संघ कहता है जो देश जितना आर्थिक सहायता प्रदान करने में सक्षम है वह देश इतना ही आर्थिक सहायता प्रदान करें। भारत आज तक संयुक्त राष्ट्र को आर्थिक सहायता प्रदान करने में कभी पीछे नहीं हटा। साल दर साल जितना हो सकता है संयुक्त राष्ट्र को आर्थिक सहायता प्रदान करता है।

भारत संयुक्त राष्ट्र में  सदस्यता सहयोग

भारत अतीत में सुरक्षा परिषद की साथ अस्थाई सदस्य देश के रूप में 14 साल तक काम किया है। संयुक्त राष्ट्र संघ के निरंतर सहयोगी देश के हिसाब से कार्य करता आ रहा है । पृथ्वी के एक शक्ति देश के रूप में भारत विश्व शांति प्रतिष्ठा के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यक्रम को सर्वदा समर्थन करता आ रहा है। 


भारत के अनेक राजनीतिज्ञ संयुक्त राष्ट्र संघ के विभिन्न अंग में सदस्य के रूप में कार्य करके उच्च प्रशंसनीय पात्र हुए हैं। सार्वजनिक मानव अधिकार घोषणा नामा (Universal Declaration of Human Rights)  चिट्ठा प्रस्तुति में भारत के गांधीवादी नेत्री श्रीमती हानसा मेहता सक्रिय अंश ग्रहण किए थे। साल 1953 में भारतीय महिला विजय लक्ष्मी पंडित संयुक्त राष्ट्र संघ के साधारण सभा में प्रथम महिला सभा नेत्री के रूप में पद में सफलता के साथ कार्य किए थे।

विकासशील देशों की हित और विकास

संयुक्त राष्ट्र संघ मैं भारत  –  विकासशील और पिछड़ा हुआ एशिया, अफ्रीका , और लातिन अमेरिका देशों की समस्याओं को मजबूती के साथ स्थापन किया है। भेदभाव निराकरण, उपनिवेशवाद विलुप्त के लिए भारत संयुक्त राष्ट्र संघ में मजबूती से युक्ति उपस्थापित किया है। इसके अलावा पृथ्वी में शांति प्रतिष्ठान, अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद विलुप्त तथा परमाणु शक्ति की शांतिपूर्ण विनियोग, परिवेश प्रदूषण निराकरण आदि के लिए भारत अपनी सूचिंतित राय दिया है ।


तीसरे विश्व के लोगों को तथा पिछड़ा हुआ देशों को आर्थिक सहायता तथा सहयोग करने के लिए प्रयास करता रहता है। भारत कहता है तीसरी दुनिया के देशों को की अपने अंदर उन्नति की भावना जागृत करके खुद निर्भर होना चाहिए । खुद निर्भर सील होने से देश की उन्नति होगी और आगे जाकर अन्य विकासशील तथा पिछड़ा हुआ देशों को सहायता प्रधान कर  पाएगी ।

United Nations Peace keeping Force

संयुक्त राष्ट्र संघ के शांति सेना वाहिनी ( United Nations Peace keeping Force ) में भारत की सेना वाहिनी सक्रिय अंश ग्रहण करने के साथ विभिन्न देशों की शांति प्रतिष्ठा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रयास को सहायता करता आ रहा है। अतीत में कोरिया, इजिप्ट, सोमालिया ,अंगाला, हाइटी , रवांडा ,कांगो मैं भारतीय सेना संयुक्त राष्ट्र संघ के शांति रक्षा वाहिनी के अंश विशेष रूप में नियोजित हुई है। 


भारत की सेना वाहिनी दुनिया के सबसे अच्छी सनी वाहिनी कहां जाता है क्यों कहा जाता है- आज तक जितनी भी शांति प्रतिष्ठा के लिए जो जो कदम लिया गया है जिम में संयुक्त राष्ट्र संघ को पीसकीपिंग फोर्स की जरूरत हुआ है और भारत की सहायता चाहा है भारत इस में कभी पीछे नहीं हटा। संयुक्त राष्ट्र  भी कहता है  भारत की सेना वाहिनी विश्व शांति प्रतिष्ठा के लिए काफी अहम सहयोगी भूमिका रहा है।


साल 2014 सुधा भारत 10 संयुक्त राष्ट्र संघ के शांति रक्षा मिशन में मोट 7,860 जन  सैनिक को नियोजित किया है। मोटा मोटी रूप से भारत अब तक प्राया 1,60,000 सैनी शांति रक्षा मिशन में नियोजित किया है। यह 43 मिशन में अंश ग्रहण किए है एवं 156 जन भारतीय शांति रक्षक सोल्जर संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में अपनी प्राण को  उत्सर्जित किए हैं।

जातीय भेदभाव का विरोध

भारत रंगभेद तथा भेदभाव को दृढ़  विरोध करता है। भारत ने ही पहली बार संयुक्त राष्ट्र संघ में भेदभाव नीति का मुद्दा रखा था । पहली बार संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में साल 1946 में रंग भेदभाव को लेकर भारत अपना बात रखा था । उस समय दक्षिण अफ्रीका, जिंबाब्वे जैसे देशों की सरकार भेदभाव नीति को समर्थन करते थे।


रंग भेदभाव तथा भेदभाव भारत की विदेश नीति का अन्य एक अंग है। काली गोरी छोटे-बड़े इन सारी भेदभाव वाली चीजों को भारत दृढ़ विरोध करता है भारत केहता है इन भेदभाव केे कारण अतीत मेंं बहुत सारे झगड़े़े़े और समस्या सृष्टि हुआ है। भेदभाव नीति से संयुक्तत राष्ट्र विश्व शांति प्रतिष्ठाा करने मे काफी दिक्कत होगा यह बात भारत समझ गया थााा इसलिए वह 1946 में भेदभाव नीति के लेकर  अन्य देशों की समर्थन से संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रस्ताव पारित किया था। जिसकेे तहत रंग भेदभाव विरुद्ध को लेकर नेल्सन मंडेला केे द्वारा चलाई गई आंदोलन का समर्थन किया। और साल 1946 मे भारत दक्षिण अफ्रीका से अपना व्यापार संबंधित और कूटनीतिक संपर्क तोड़ दियाा था।

निरस्तीकरण

बड़े-बड़े देशों की सामरिक हत्यार देख के छोटे-छोटे देश भी अस्त्र शास्त्र की तैयारी कर चुके हैं। देश देश के बीच में अस्त्र-शस्त्र की जो प्रतियोगिता है आरंभ हो चुका है जिसके द्वारा सारा विश्व में है  डर , असहयोग और विनाशकारी वातावरण दिखाई देने लगा है। इसलिए विश्व शांति प्रतिष्ठा के लिए निरस्तीकरण नितांत आवश्यक है।


संयुक्त राष्ट्र संघ में 28 अक्टूबर 1959 को लाया गया पूर्ण निरस्त्रकरण प्रस्ताव को भारत पूर्ण समर्थन दिखाया था। द्वितीय विश्वयुद्ध की भयानक ता को देखकर भारत विश्व में शांति प्रतिष्ठा के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ को निरस्तीकरण के लिए पूर्ण समर्थन दिखाया है। परमाणु बम तथा अनेक हत्या खारी साधन तथा  विनाशकारी हत्यर को रोक लगाने के लिए भारत हमेशा आगे आया है । निरस्तीकरण के लिए भारत सर्वदा संयुक्त राष्ट्र संघ को अपना सलाह और समर्थन प्रदान किया है।

अंतर्राष्ट्रीय शांति प्रतिष्ठा मे भारत की भूमिका

भारत एक शांतिप्रिय देश है। भारत प्रथम से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति बनाए रखने का काम करता आ रहा है। भारत जनसंख्या दृष्टि से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है इसलिए भारत सर्वदा शांति जी चाहता है । यहां की जनसंख्या ज्यादातर मिलजुल कर रहना पसंद करते हैं।


भारत के विदेश नीति में भी विश्व शांति को लेकर वर्णन किया गया है। भारत के विदेश नीति संपर्क में संविधान के चौथे भाग की 52 धारा में कहा गया है कि भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और सुरक्षा के लिए सर्वदा अपना कदम आगे रखेगा। अंतरराष्ट्रीय कानून और समझौता को सम्मान प्रदर्शन करेगा। भारत की विदेश नीति में मौलिक विशेषता है – अंतरराष्ट्रीय शांति सुरक्षा रक्षा, उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का विरोध, पंचशिला नीति और शांतिपूर्ण मिलजुल मे रहना , अंतर्राष्ट्रीय विभाग की शांतिपूर्ण समाधान करना और पड़ोसी राष्ट्र को सहयोग दिखाना । इन सारी नीति से भारत की शांति प्रतिष्ठा दिखा में क्या अहम रोल है यह दिखाई देता है।

• G-77 एवं G-15 मैं भारत सक्रिय सदस्य के रूप में कार्य संपादन करता आ रहा है।


• साल 1953 में कोरिया युद्ध समाप्ति में भारत गुरुत्व पूर्ण भूमिका निभाया था।


• साल 1954 में वियतनाम, कंबोडिया, लागोस देख एक और नियंत्रण के लिए गठित अंतरराष्ट्रीय कमीशन में भारत नेतृत्व लिया था।


• कोरिया ,सोमालिया , अंगेला , दक्षिण सूडान,  लाइबेरिया, हाइटी आदि देशों में संयुक्त राष्ट्र संघ की शांति सेना में भारतीय सेना शामिल हुआ है।


• गोष्टी निरपेक्ष आंदोलन में  नेतृत्व लेकर भारत दुनिया से युद्ध, हिंसा और शीत युद्ध की विलुप्त के लिए आवाज उठा रहा है।


• संयुक्त राष्ट्र में सुधार लाने के लिए भारत सर्वदा प्रस्ताव देता आ रहा है।

संयुक्त राष्ट्र संघ भी भारत के लिए सामाजिक और आर्थिक विकास क्षेत्र में प्रशासनिक कार्य किया है। भारत से गरीबी हटाना, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में उन्नति, अन्य अन्य विकास क्षेत्र में भारत को सहायक और सहायता करता आ रहा है ।


अतीत में मौलाना अबुल कलाम आजाद और डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन यूनेस्को( UNESCO) मैं अध्यक्ष रूप में कार्य किए हैं । श्रीमती राजकुमारी अमृता कौर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) में अध्यक्षा हुए थे। डॉ. होमी जहांगीर भाभा शांति के लिए परमाणु आयोग मे अध्यक्ष हुए थे। इसके अलावा भारतवर्ष मे अनेक विचारशील व्यक्ति अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में स्थाई विचार प्रति के रूप में कार्य संपादन किए है।


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