इमैनुएल कांट जीवन परिचय, दर्शन | immanuel Kant Biography in hindi

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इमैनुएल कांट एक जर्मन दार्शनिक है और केंद्रीय ज्ञानोदय विचारकों में से एक थे। कोनिग्सबर्ग में जन्मे, कांट के ज्ञानमीमांसा, तत्वमीमांसा, नैतिकता और सौंदर्यशास्त्र में व्यापक और व्यवस्थित कार्यों ने उन्हें आधुनिक पश्चिमी दर्शन में सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में से एक बना दिया है।

इमानुएल कांट जीवन परिचय (immanuel kant biography in hindi)

जन्म

इमैनुएल कांट जर्मनी के दार्शनिक थे, जो जर्मनी के पूर्वी प्रशा प्रदेश के अंतर्गत, कोनिगुज़बर्ग नगर में घोड़े का साधारण साज बनानेवाले के घर 22 अप्रैल सन् 1724 ई. जन्म हुए थे। उनके पिता थे जोहान जॉर्ज कैंट और माता अन्ना रेजिना कैंट, इमैनुएल कांट नौ बच्चों में से चौथे थे।
कोनिगुज़बर्ग आज रूस में स्थित है, और इसका नाम रखा गया है Kaliningrad

Kant हमेशा सरल जीवन जिए , वह ज्यादा घूमते फिरते नहीं थे अपनी ज्यादातर जीवन पढ़ाई में ही गुजार दी, वह हमेशा पढ़ते रहते थे। फिलॉसफी, विज्ञान, आदि बुक पढ़ने में ही अपना समय बिताते थे।

1740 में, कांट ने कोनिग्सबर्ग विश्वविद्यालय में एक धर्मशास्त्र के छात्र के रूप में दाखिला लिया, लेकिन जल्द ही गणित और भौतिकी के प्रति आकर्षित हो गए।

1746 में, उनके पिता की मृत्यु हो गई और उन्हें अपने परिवार की मदद के लिए विश्वविद्यालय छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। एक दशक तक, उन्होंने अमीरों के लिए एक private tutor के रूप में काम किया। इस समय के दौरान उन्होंने तर्कवाद और अनुभववाद के बीच के मध्य आधार की खोज करते हुए वैज्ञानिक प्रश्नों से संबंधित कई पत्र प्रकाशित किए।

1755 में वह फिर से यूनिवर्सिटी लौटे और अपनी पढ़ाई पूरी की। उसी वर्ष इमानुएल कांत ने दर्शनशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की, अगले 15 साल तक रोहित विश्वविद्यालयों में  एक अध्यापक काम किया था।

1770 में, वह कोनिग्सबर्ग विश्वविद्यालय में एक पूर्ण प्रोफेसर बन गए, जो metaphysics और तर्कशास्त्र पढ़ाते थे। पढ़ाने के साथ-साथ अपनी रचनाएं लिखते थे।

इमानुएल कांट जब भी घूमने निकलते थे एक निर्दिष्ट समय के अनुसार ही निकला किया करते थे । कांट अपना खाना, पीना, बैठना, सोना सब एक निर्दिष्ट टाइम टेबल के अनुसार ही किया करते थे।

मृत्यु

कांट ने अपनी मृत्यु तक लिखना जारी रखा, हालांकि, उनकी तीव्र स्मृति हानि के कारण उनके अंतिम वर्षों के दौरान उनका लिखना कठिन होता गया। 12 फरवरी 1804 को 80 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। कांटियन दर्शन ने आधुनिक दर्शन की नींव भी रखी और सदियों से जनता को प्रभावित किया है।


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