IMF – International Monetary Fund | अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष

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 विश्व बैंक जैसी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)भी अलग एक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संस्था है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को ब्रिटेन वुड्स सम्मेलन में 1944 को बनाने के लिए सिफारिश किया गया था। इस सिफारिश के तहत साल 1945  दिसंबर 27 में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष को बनाया गया था। यह संस्था 1 मार्च 1947 में संपूर्ण रुप से 29 जन सदस्य को लेकर अपना कार्य आरंभ किया था।

आईएमएफ का उद्देश्य क्या है ?

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष बनाने का उद्देश्य यह था कि द्वितीय विश्वयुद्ध के समय क्षतिग्रस्त हुआ देशों की आर्थिक स्थिरता लाना, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को सुगम करना और विश्व स्तर पर देश-देश के बीच में आर्थिक सहयोग बढ़ाना।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की संगठन 

विश्व बैंक जैसी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष भी तीनों  को लेकर बनाया गया है वह है – गवर्नर परिषद(Board of Governors), कार्य निर्वाह परिषद (Executive Board) और परिचालना निर्देशक (Managing Director) कोलेकर बनाया गया है। बोर्ड ऑफ गवर्नर सारे सदस्य देशों की प्रतिनिधि को लेकर गठित होता है। यह परिषद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सर्वोच्च प्राधिकारी के रूप में कार्य संपादन करता है। 


IMF की दैनिक कार्य करने के लिए गवर्नर परिषद से ही 24 जन  कार्य निर्वाह निर्देशक चुना जाता है जिसको कहते हैं कार्य निर्वाह परिषद । यह परिषद द्वारा संस्था की दैनिक कार्य संपादित किया जाता है  । इन 24 कार्य निर्वाह निर्देशक के बीच में एक को मैनेजिंग डायरेक्टर चुना जाता है । मैनेजिंग डायरेक्टर कार्य निर्वाह परिषद के मुख्य के रूप में  कार्य करते हैं। 


भारत– भारत की तरफ से वित्त मंत्री बोर्ड ऑफ गवर्नर में प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन हर देश एक गवर्नर के साथ अल्टरनेटिव गवर्नर भी भेजते हैं। भारत की तरफ से अल्टरनेटिव गवर्नर के रूप में आरबीआई के गवर्नर जाते हैं । वित्त मंत्री फुल टाइम बोर्ड ऑफ गवर्नर होते हैं । 


भारत की तरफ से यदि कभी किसी कार्य निर्वाह निर्देशक को चुना जाता है तो भारत केवल भारत की ही नहीं बल्कि भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका का भी प्रतिनिधित्व करता है।

आईएमएफ का मुख्यालय कहां है ?

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की मुख्यालय युक्त राष्ट्र अमेरिका के वाशिंगटन डी.सी. में स्थित है। अभी तक आईएमएफ की कुल 189 सदस्य्य है। भारत 1944 से इस संस्था का सदस्यय है। 189 देशों में  जो 189 नंबर सदस्य है वह है नीरू(Nauru)  देश जो 12 अप्रैल 2016 को शामिल हुआ था । 

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष  क्या क्या कार्य करता है?

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष विश्व स्तर में आर्थिक और व्यापार संबंधित पिचालना क्षेत्र में एक प्रमुख अनुष्ठान के रूप में कार्य करता है। इसकी कार्य नीचे  लिखी गई है-


1. आर्थिक विकास और स्थिरता के लिए सदस्य देशों को आर्थिक परामर्श देना।


2. आर्थिक दृष्टिकोण से दुर्बल देशों की आर्थिक विनिमय और कारवार व्यवस्था में  स्थिरता लाने के लिए सहायता करना।


3. अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुगम अभिवृद्धि के लिए प्रयास करना।


4. अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन  संतुलन (Balance of payment) समस्या को मुकाबला  के लिए सदस्य देशों  को सहायता करना ।


5. आर्थिक दृष्टिकोण से पिछड़ा हुआ देशों को कम दर में कम समय के लिए लोन प्रदान करना ।


6.  गरीबी हटाना, रोजगारी सृष्टि करना और निरंतर आर्थिक विकास के लिए सदस्य देश को परामर्श और सहायता देना।


7. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुद्रा व्यवस्था (Currency System) में स्थिरता लाना और तेज आर्थिक विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक उत्तम परिवेश सृष्टि करना।


8. अंतर्राष्ट्रीय विनिमय-दर (Exchange-rate ) व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए कार्य करना ।


9. सदस्य देशों की आर्थिक नीति और कार्यक्रम के ऊपर जॉच,  नियंत्रण और निगरानी रखना।


10. आर्थिक अभिवृद्धि , मूल विकास, दक्षता वृद्धि के लिए यह विकासशील देशों को तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करना।


11. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यापार और मुद्रा व्यवस्था की निगरानी (Watch-dog) रखने का काम करता है और  सदस्य राष्ट्रों को आर्थिक उन्नति और अभिवृद्धि के लिए परामर्श देने के साथ-साथ आर्थिक समस्या से लड़ने के लिए उपयोगी परामर्श प्रदान करता है ।


लोन देने से पहले आईएमएफ (International Monetary Fund) का शर्त क्या होता है?


साधारण रूप से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आर्थिक संकट से जूझने वाले सदस्य देशों को सहायता देता है। सहायता अथवा लोन प्रदान करने के समय सदस्य देशों की 4 शर्तों को मानना पड़ता है 


1. वह देश एक गरीब देश होना चाहिए ।


2. दीर्घकालीन विकास के लिए  देश को प्रतिष्रुति देना होगा।


3. लेन-देन के क्षेत्र में देश आर्थिक संकट से जूझता हुआ होगा ।


4. विकास के लिए निर्धारित नीति को  कार्य करने के लिए प्रतिष्रुति देना होगा।

वर्ल्ड आउटलुक रिपोर्टवर्ल्ड आउटलुक रिपोर्ट एक प्रकार का सर्वे होता है जो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जारी करता है । यहां सर्वे साल में दो बार(6, 6 महीना के अंतरराल पर) किया जाता है जिससे देश की आर्थिक स्थिति  कैसी है उस बारे में पता चलता है। यह सर्वे देश की माइक्रो इकोनॉमी के आधार पर किया जाता है।

माइक्रोइकोनॉमिक का अर्थ है G.D.P. , मुद्रास्फीति, और बैंक की स्थिति को बुझाता है। इससे वह देश के आर्थिक स्थितियां के बारे में पता चलती है।


आशा करता हूं दोस्तों आपको यह जानकारी काफी मददगार रही होगी। आपकी संतुष्टि मेरे लिए एक प्रेरणा का स्रोत होगा । यदि आपको इस लेख में कुछ जानने को मिला तो दया करके कमेंट करके बताइएगा ।


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