वीरान खंडहर- एक डरावनी रात | भूतिया कहानी

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मैं अभिमन्यु , लोग कहते हैं कि मैं बहुत अच्छा राइटर हूं पता नहीं क्यों? मुझे नहीं लगता।  आपकी हिंदी हॉरर स्टोरी लोगों को बहुत अच्छी लगती है ऐसा लोगों का कहना है। बात भी सही है , आज की मॉडर्न युग में लोगों को भूत प्रेत इन सभी चीजों में कोई विश्वास नहीं . लेकिन यह बात भी सच है की लोगों को भूत प्रेत से जुड़ी हुई कहानियां सुनना बहुत अच्छा लगता है। और मुझे भूतिया कहानियां लिखना। लेकिन इतना अच्छा भी लिख नहीं पता, आप लोग ही बताना-कि कैसा लगा मेरी हिंदी हॉरर स्टोरी वीरान खंडहर पढ़कर। लेकिन यह कहानियां अभी तक नहीं लिखी गई है ।

मेरा घर नदी के पास है बोला जाए तो नदी किनारे से थोड़ी दूर। नदी से लग के लार्मीडोंगर नाम का जंगल। घर से नदी की दृश्य काफी मनोहर। इन प्राकृतिक मनोहर दृश्य में खोए रहना  काफी अच्छा लगता है। बात भी सही है मनुष्य एक प्राकृतिक जीभ है लेकिन वह आज भूल चुका है, प्रगति के नाम पर प्रकृति को विनाश करने में लगा है।

शाम के समय इन नदी से आती ठंडी हवा मानो मेरी कानों में कुछ कहती जाती है और उससे मैं कागज में उतार देता हूं और इसको लोग कहानियां कहते हैं।

अभिमन्यु शाम के समय घर के पीछे की बगीचे में बैठकर चाय की चुस्की ले रहा था। सच्ची में नदी किनारे सूर्य अस्त की मनोहर दृश्य मन को छू लेता है। कभी चाय पीते पीते अभिमन्यु को भी ख्याल आता है कि आज वह जो सोच रहा था, उसकी कहानी, कैसे आरंभ करें वीरान खंडहर की शुरुआत कैसे करें।

रात के 8:00 बजे, अभिमन्यु गांव से थोड़ी दूर  वीरान घर में अकेला एक सन्नाटा छाया हुआ कमरे की एक टेबल के पास बैठा हुआ है। टेबल के ऊपर एक पुरानी टाइपराइटर, कुछ Draft pepper , 2 कलम और कुछ किताबे रखा हुआ था। और दूसरी तरफ कुछ फोटो के साथ कुछ बर्तन रखा हुआ था।

अभिमन्यु के हाथ टाइपराइटर के ऊपर, उसकी उंगलियां चलने लगी, पूरे कमरे में सन्नाटा छाया हुआ था केवल टाइपराइटर की खटखट आवाज चारों ओर गूंज रहा था। वीरान खंडार अभिमन्यु की लिखी हुई आज तक की सबसे भयंकर भूतिया कहानी होगी। यह सोचते सोचते अभिमन्यु लिखता चला गया। आज रात  कुछ खाया नहीं यह बात भी भूल गया है। सच में एक राइटर के लिए कहानी की शुरुआत करना बहुत ही कठिन होता है लेकिन शुरुआत की लाइन में कलम दो कदम चल दिए तो कहानी समाप्त होने तक रुकने का नाम ही नहीं लेता।

अभिमन्यु खो गया था। लग रहा था आज वह समाप्त करके ही रहेगा। लेकिन सन्नाटे से छाया हुआ कमरे में अचानक जमझाम से बर्तन गिरने की आवाज सुनाई दी । यह सुनकर अभिमन्यु चौक पड़ा। नजर घुमा कर देखा तो एक काली बिल्ली कमरे में घुस आई थी  । यह दृश्य अभिमन्यु को आश्चर्य में डाल दिया आज तक घर में एक बिल्ली तक दिखाई नहीं दी थी अचानक यहां काली  बिल्ली का दिखना अभिमन्यु को हैरान कर दिया।

अभिमन्यु घड़ी की तरफ नजर उठा कर देखा तो रात की 1:00 बज गया था। तभी उसे याद आया उसे 10:00 बजे ही सो जाना था, लेकिन 1:00 बज गया। कल उसे पब्लिशर के पास मिलने जाना है । पब्लिशर अपने न्यू बुक पब्लिश दुकान का एड्रेस अभिमन्यु के मोबाइल पर भेजे दीए हैं। यह भूल गया था अभिमन्यु। रात काफी हो गई थी , अभिमन्यु को सुबह सुबह उठना था इसलिए वह एक घड़ी में 5:00 बजे की Alarm Set  किया और बेड के पास टेबल पर रख कर सो गया।

सुबह हुआ अभिमन्यु नहा धोकर तैयार हो गया। जरूरत की चीजें एक बैग में रख लिया और घर के बाहर आया और देखा तो बाइक की टायर पंचर हुआ पड़ा है। चलते चलते गांव के बाहर सड़क पर पहुंच गया, वहां से एक Auto पकड़ा और निकल गया। auto वाला एड्रेस पूछने पर वह अपने मोबाइल बाहर कर के  एड्रेस दिखा दिया । पब्लिशर का बुक पब्लिक दुकान काफी दूर होने के कारण और कुछ रास्तों में समस्या होने के कारण पहुंचते-पहुंचते शाम के 4:00 बज गए।

ऑटो वाला अभिमन्यु को गांव के अंदर ले के नहीं गया उसे बाहर चौराहे पर ही छोड़ कर वापस चला गया। अभिमन्यु पहली बार इस गांव में आया था वह इस गांव को देखकर हैरान रह गया चारों तरफ घर ही घर । घरों के बीच होकर 7 फुट चौड़ाई एक रास्ता नदी के तरफ गया था। हैरान करने वाली बात यह है कि रास्ते के चारों तरफ 20, 25 घर होने के बावजूद गांव में एक भी लोग दिखाई नहीं दे रहा था यह चकित करने वाली घटना है।

मैं अभिमन्यु ,  इस गांव में इतने सारे घर होने के बावजूद कोई दिखाई क्यों नहीं दे रहा। अब कैसे पूछूं ,किसको पूछूं- बुक पब्लिश दुकान कहां है । कौन है जो यह बताएगा।

अभिमन्यु अपने पैर आगे बढ़ाने लगा, जैसे ही एक कदम बढ़ाया था कि अचानक उसकी रास्ते मे एक काली बिल्ली रास्ता काट के चली गई। अभिमन्यु को याद आया उस बिल्ली का जो कमरे में थी बिल्कुल ऐसे ही दिख रही थी। बे यह घटना को नजरअंदाज करके आगे बढ़ता गया । चारों तरफ सन्नाटा एक परिंदा तक दिखाई नहीं दे रहा था।

कुछ दूर आगे जाने के बाद अभिमन्यु को एक छोटे से घर के पास एक साया दिखाई दि। अभिमन्यु को कुछ सांप सांप दिखाई नहीं दे रहा था केवल एक धुंधले साये के अलावा। निडर अभिमन्यु उस साये की तरफ अपने पैर बढ़ाने लगा। जैसे ही दूरियां कम होते गया वह देखा वहां एक लड़की खड़ी थी। लड़की को देखकर अभिमन्यु की परेशानी खत्म हो गई। अब वह पूछ सकता है यह पब्लिकेशन हाउस कहां है?

लड़की काफी सुंदर थी। लड़की को देखकर अभिमन्यु खो सा गया, वह मन ही मन सोचने लगा , ऐसा लग रहा था कि वह लड़की को कई सदियों से जानती है। उसे देख कर अपनापन लगने लगा । अभिमन्यु पहले किसी लड़की की करीब नहीं आया है। आज यह लड़की इसको अपना लग रहा है क्यों?

लड़की दिखने में काफी सुंदर और सुशील दिख रही थी। एक काली साड़ी पहन के खड़ी हुई थी । वह लड़की अभिमन्यु को देखकर बोली “तुम किसे ढूंढ रहे हो बाबू “?

अभिमन्यु खाबो से बाहर निकलकर बोला ” आप -आप इस गांव में सिर्फ अकेले रहते हो” । अभिमन्यु के अंदर अपने मूल प्रश्न को छोड़कर इस लड़की के बारे में जानने की चाहत जगी। वह भूल गया था कि वह यहां क्या करने आया है।

“नहीं नहीं बाबू आज दशहरा है ना इसलिए सब लोग पहाड़ के ऊपर देवी गुड़ी के मंदिर में गए हैं। आज पूजा है ना सब लोग वहा ही होंगे है। यह गांव का एक प्रधान पूजा है, जहां गांव  के सभी लोग एकत्र होते हैं सब लोग देवी गुड़ी को मन्नत मांग के उनके चरणों में बतक, मुर्गा आदि की बलि देते हैं।  पूजा से गांव का मंगल होता है। लेकिन आप क्या करने आए हो बाबू ?”

मुझे यह बुक पब्लिकेशन हाउस कहां है पता करना था । क्या आप बता सकती है ? यहां कोई भी नहीं है जो मैं किसी से पूछ लूं । आप ही मदद कर दीजिए ना।

“बिल्कुल बाबू मैं ले चलूंगा आपको पब्लिकेशन हाउस।” अभिमन्यु हिचक के “नहीं – नहीं आप क्यों परेशान होंगे आप बता दीजिए कहां है मैं चला जाऊंगा”। “अरे बाबू आप हमारे गांव के मेहमान है आपकी मदद करना यह  कैसी परेशानी है चलिए मैं आपको ले चलता हूं” ।

अभिमन्यु थोड़ी देर ही चखने के बाद मान गया वह उस लड़की के साथ आगे बढ़ने के लिए रेडी हो गया।

दोनों लोग आगे बढ़ते गए। आगे एक छोटी सी नदी आई . नदी पार होने के बाद रास्ता दो भाग में बट जाएगा। चलते चलते अभिमन्यु मन ही मन सोच रहा था। कौन है यह लड़की,  क्या इसे मैं जानता हूं । अनेक  ख्याल उसके मन में आ रहा था। यह बारे में लड़की को पूछे या ना पूछिए सोचते जा रहा था रास्ते भर।

दोनों लोग आगे बढ़ते जा रहे थे पहाड़ी की ओर तभी लड़की ने अभिमन्यु को पूछा “वैसे आप पब्लिशर अंकल को क्यों मिलने आए हैं।” अभिमन्यु जवाब में कहां “मुझे कहानियां लिखना अच्छा लगता है और यह कहानियां लोगों के पास पहुंचाना चाहता हु । मेरी जितने भी बुक उनसे ही पब्लिक करवाता हूं , वह तो अपने पब्लिशिंग हाउस बदल कर इस एड्रेस में शिफ्ट कर दिए इसलिए उन्हें ही मिलने आया हूं अपनी कहानी को रूप देने के लिए ।”

“तो बाबू आप एक लेखक हो” लड़की ने कहा। “वैसे आप कौन सी कहानियां लिखते हैं” अभिमन्यु जवाब मे “मैं सारी हॉरर स्टोरीआ ही लिखता हूं ” । “सच्ची में बाबू मुझे भी हॉरर कहानियां सुनना बहुत अच्छा लगता है।” लड़की की यह बात सुनकर अभिमन्यु मन ही मन खुश होने लगा।

“आपको पता है बाबू हमारे गांव में भी एक ऐसी कहानी है” यह बात सुनकर अभिमन्यु ने पूछा “कौन सी कहानी- माया

इसमें ध्यान देने वाली एक बात है . वह क्या?

यह सुनकर लड़की हंसने लगी और कहां “छोड़िए ना बाबू गांव के कहानी में क्या रखा है आप बताइए आप की लिखी हुई कहानी” । “जब बुक पब्लिश होगी तब पढ़ लेना अभी तुम बताओ ना क्या है कहानी” अभिमन्यु के बार बार पूछने के कारण लड़की ने वह कहानी कहने के लिए मान गई ।

आपको पता है बाबू इस गांव को लोग श्रापित गांव भी कहते हैं । आज से कुछ साल पहले यहां एक लड़की अपने बाबा के साथ रहती थी। मायावती  उसके  नाम। काफी सुंदर थी मेरी जैसी। यह बात सुनके अभिमन्यु के मुंह से एक हंसी बहार आई। लड़की ने कहा “क्या हुआ बाबू आप हंस क्यों रहे है क्या मैं सुंदर नहीं दिखती”।
अभिमन्यु अपने आप को शर्मिंदा महसूस करके कहा ” नही नहीं ऐसी बात नहीं है आप तो उससे भी बहुत खूबसूरत हो, आपको देखकर तो कहीं भी पिघल जाएगा” ।

लड़की हंसते हुए “छोड़िए ना बाबू आप भी, कहानी सुनिए – गांव में एक सुंदर सा लड़का भी रहा करता था, नाम था उसका मुकुंद। मायावती और मुकुंद एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे लेकिन यह बात किसी को पता नहीं था जब पता लगा तो मायावती की बाबा ने उन दोनों को अलग कर दिया। इस कारण से मुकुंद जीने का आस छोड़ दिया। मुकुंद फांसी लगाकर अपनी जान दे दी ।

यह घटना मायावती की जिंदगी को भी छीन ले गया वह भी फांसी लगाकर अपनी जीवन त्याग दी। मुकुंद तो दुनिया से मुक्त हो गया लेकिन कहते हैं मायावती अभी भी इस गांव में घूमती हैं एक मनहूस काले साए की तरह जो भी उस साए के रास्ते में आता है वह किसी को नहीं छोड़ती।

ऐसे ही बात करते करते वह दोनों काफी आगे आ गए थे गलत दिशा में। नदी पार होने के बाद रास्ता बट गया था उन दोनों को दाएं तरफ जाना था लेकिन वह लोग बाएं तरफ आ गए थे एक वीरान सा खंडहर के पास। वहां एक विराट  बरगद का पेड़ था ।

पेड़ को देखकर अचानक लड़की रुक गई , कहानी से बाहर आकर वह नजर घुमाने हुए चारों तरफ देखने लगी । यह दृश्य देखकर लड़की के पैरों तले की जमीन खिसक गई । उसकी आंखे फटी की फटी रह गई। वह अचानक अभिमन्यु के हाथ पकड़ने लगी। लड़की को घबराते हुए अभिमन्यु हैरान रह गया। अभी तक वह समझ नहीं पाया लड़की का घबराना।

“क्या हुआ तुम घबरा क्यों रही हो” अभिमन्यु ने पूछा अचानक लड़की का जवाब “हम गलत दिशा में आ गए हैं बाबू हमें यहां नहीं होना चाहिए था इस जगह मनहूस है यहां से जल्दी निकल जाना ही भलाई है नहीं तो आज हम गए” ।

अभिमन्यु “ऐसा क्यों कह रही हो, क्या है इस जगह में  , कौनसा है यह जगह?”

लड़की घबराते हुए अभिमन्यु के तरफ देखते हुए कहां-” बाबू आपको जो मैं कहानियां सुना रही थी उसका अंत है यहां। इस बरगद पेट में मुकुंद ने अपनी जान दे दी थी इसके साथ साथ मायावती ने भी यहां फांसी लगाकर झुल गई थी। यहां से जल्दी चलो बाबू”। 6:00 बज गए था, चारों तरफ अंधेरा फैलता जा रहा था। तभी अचानक बादल घड़ घड़ाने लगा हवाई तेज चलने लगी। बरगद की पत्तियां झड़ झड़ाने लगा, बिजली चमकने लगा।

अचानक अभिमन्यु की आंखें पढ़ती है  पास के बड़े से खंडार पर।  बिजली की चमक मे से उभरता हुआ धुंधला सा एक काली साया खंडहर के अंदर दिखाई दी। यह देख अभिमन्यु अपनी आंखों पर यकीन कर नहीं पा रहा था। बस इस समय सोच रहा था “आज तो हम गए” तभी उसे एक फुसफुस ने की  आवाज सुनाई दी ” तुम आ गए, बरसों से तुम्हारे इंतजार में थी” । तभी बरगद के पेड़ में से एक डाई टूटके  धड़ाम  से नीचे गिर गया। यह आवाज सुन के दोनों लोग वहां से निकलने लगे, दौड़ने लगे। दौड़ते दौड़ते लड़की धड़ाम से नीचे गिर गई। अभिमन्यु अपनी हिम्मत जुटा के लड़की को उठाने लगा। लड़की उठ खड़ी हुई। अपनी सारी शक्ति लगा के वह दोनों वहां से जान बचाकर निकल आए। दौड़ते दौड़ते नदी के पास पहुंच गए। इस तरफ बिजली चमक रही थी, दोनों हांप रहे थे ,  दोनों की दिल की धड़कन जोर-जोर से धड़क रही थी। डर के मारे दोनों के हालत खराब हो गई थी।

हक लाते हुए लड़की ने कहा “बाबू आज हम बच गए . बाल-बाल बचे लेकिन कैसे ? आज तक  उस खंडहर की ओर जो भी गया है कभी लौट के वापस नहीं आया है। हम कैसे आ गए ?

“हां बिल्कुल आज का दिन ही खराब है” अभिमन्यु ने कहा “आया था पब्लिशर को मिलने, वह काम भी नहीं हो पाया  और अभी ये मायावती हमें मार ही डाली थी । मन ही मन अभिमन्यु को एक बात सताई जा रही थी , वहां पर वह फुसफुस ने की आवाज उसे क्या कहने वाला था। तभी लड़की की बोलने की आवाज सुनाई दी।

“अभिमन्यु बाबू किस सोच में पड़े हो” । अभिमन्यु सीधा खाबो से बाहर आकर “नहीं नहीं ऐसी कुछ बात नहीं सोच रहा था की जिस काम में आया था वह काम तो हो नहीं पाया, देखते देखते रात हो गई  ,में इस गांव में किसी को जानता तक नहीं कहां रुकूंगा ?

“बाबू आप मुझे तो जानते हैं ,आज रात मेरे घर में रुक जाइएगा “। अभिमन्यु नदी के तरफ देखते हुए “नहीं नहीं मैं तुम्हें और तकलीफ नहीं दे सकता , मैं यही नदी किनारे सो जाऊंगा , कल पब्लिशर को मिल कर चला जाऊंगा और नदियों से तो मुझे प्यार है । तुम मेरे लिए और तकलीफ मत उठाओ रात बहुत हो गई है अपने घर चले जाओ” तभी अभिमन्यु याद आया- वैसे तुमने अभी तक अपना नाम नहीं बताया , क्या है तुम्हारा नाम और तुम्हारा घर कहां है?

लड़की हंसते हुए कहती है “मेरा नाम है मायावती कुछ देर पहले ही तो आप ने बुलाया था” । “तूम मायावती” घबराते हुए अभिमन्यु ने कहां “मैंने कब बुलाया था तुम्हारा नाम, और तुम रहती कहां हो”

हंसते हुए लड़की ने धीमी आवाज में कहा “अभिमन्यु बाबू यही पास मे ही  तो है मेरा घर जहां से अभी आए हैं   – वीरान खंडर ।

यह बात सुनके अभिमन्यु घबरा गया वह नजर घुमा के लड़की के तरफ देखा उसका, चारों तरफ सन्नाटा वहां कोई नहीं था केवल काली अंधेरी रात के अलावा। तभी उसके ऊपर एक काले साया झपट ने की आभास ।

तभी टेबल के ऊपर रखी घड़ी के अलार्म बजने लगा । अभिमन्यु चौक के उठ गया देखा वह अपने घर के कमरे के बेड पर लेटा हुआ है। घड़ी की तरफ नजर घुमाया 5:00 बज गए थे। अभिमन्यु घबरा गया था मन ही मन सोच रहा था अभी तक उसके साथ जो कुछ भी हुआ बस यह एक डरावना सपना था।

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