स्टालिन जीवन परिचय | Biography of Stalin in Hindi.

Published by Dakshya on

जोसेफ स्टालिन कौन थे?

आज हम आपको ऐसे शासक के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे दुनिया एक  खतरनाक तानाशाह के रूप में पहचानती है। यह लेख में जोसेफ स्टालिन के जीवन परिचय के बारे में जानेंगे. कुछ लोग उन्हें एक बुरा तानाशाह और कुछ लोग एक अच्छे शासक के भी कहते हैं।

लेनिन के बाद रूस का सत्ता संभालने आए जोसेफ स्टालिन लेलिन से पूरे विपरीत थे. लर्निंग के बाद स्टालिन रसिया के राष्ट्रपति बने. वह अपने शासनकाल में एक लाख से भी अधिक लोगों को मरवा दिए थे। हालांकि इन हत्याओं में उनका हाथ डायरेक्ट नहीं था. इनडायरेक्ट इन सभी हत्या ए करवाते थे.

ज्यादा समय ना करते हुए चलिए शुरू करते हैं Biography of Stalin के बारे में पूरी जानकारी. इन्हें सोवियत संघ के प्रणेता भी कहा जाता है। एक गरीब बच्चा कैसे बना इतने बड़े देश का शासक, क्रूर तानाशाह, कई लोग इन्हें कुरु हत्यारा भी कहते हैं।

जोसेफ स्टालिन जीवन परिचय – Biography of Stalin in Hindi

जोसेफ स्टालिन 18 दिसंबर 1879 रसिया के जरिया शहर में स्थित Gori नामक एक छोटे से गांव में जन्म हुए थे। उनका वास्तविक नाम था Losif vissarionovich Jughashvili बाद में उनका नाम स्टालिन हुआ.   उनके पिता Besarion Jughashvili जो एक मोची थे. और माता Ketevan Geladze कपड़े धोने की काम किया करती थी।

जोसेफ स्टालिन अपने माता पिता के एकमात्र जीवित संतान थे। उनके तीन भाई-बहन जन्म लेने से पहले ही मर गए थे। जोसेफ स्टालिन बचपन से ही अच्छे हेल्थ कह रहे थे ना दुबला पतला ना मोटे थे. बचपन में उन्हें Soso नाम से बुलाया जाता था.

जोसेफ स्टालिन का बचपन का ही दयनीय था। उनके पिता बचपन में उन्हें बहुत मारते थे. छोटी-छोटी गलतियों में कड़ी से कड़ी सजा मिलता था. बचपन में पिता से बहुत मार खाते थे मानसिक और शारीरिक रूप से अत्याचार करते थे. लेकिन उनके जो माता थी वह उन्हें बहुत प्यार करते थे . मां का हमेशा सपोर्ट रहता था।

उनके माता चाहते थे स्टालिन एक पादरी बने. और शिक्षा के लिए स्कूल गए वहां भी उनको पीटा मारा जाता था. वहां भी उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ दिया गया था।

फिर भी जोसेफ स्टालिन पढ़ाई में काफी रूचि रखते थे. उन्हें पुस्तक पढ़ना बहुत पसंद था. वह आगे जाकर अपने लिए एक लाइब्रेरी बनाई जिसमें बहुत सारे किताबें रखा गया था। कहते हैं स्टालिन दिन के 500 से अधिक पेज पढ़ते थे.

जोसेफ स्टालिन लेनिन से बहुत प्रभावित थे। उन्हें बुक पढ़ना बहुत पसंद था. मार्क्सवाद के ऊपर लिखी गई पुस्तक बहुत पसंद था. कार्ल मार्क्स ए भी बहुत इनफ्लुएंस हुए थे।

जोसेफ स्टालिन यंग व्यवस्था में रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट में जुड़ गए. यह समय वह लेनिन के ध्यानाकर्षण में आए थे.

1901 मैं वह सोशियल डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी में जुड़ गए और फूल टाइम रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट के लिए काम करने लगे.

स्टालिन बोल्शेविक क्रांतिकारियों के साथ जुड़ गए। यह लोगों का एक भूमिगत समूह था जो कार्ल मार्क्स के साम्यवादी लेखन का अनुसरण करता था और इसका नेतृत्व व्लादिमीर लेनिन ने किया था।

स्टालिन बोल्शेविकों के भीतर एक नेता बन गया। उन्होंने दंगों और हड़तालों का नेतृत्व किया और यहां तक ​​कि बैंकों और अन्य अपराधों को लूटकर पैसे भी जुटाए। जल्द ही स्टालिन लेनिन के शीर्ष नेताओं में से एक बन गया।

लेनिन के पर काफी प्रभावित थे। लेनिन भी स्टालिन के काम के ऊपर खुश थे उन्होंने अपनी दो पत्रिका मैं एडिटर के रूप में स्टालिन को चुना था। स्टालिन भी यह काम बड़े अच्छे से किए थे.

1917 में रूसी क्रांति हुई। यह तब था जब ज़ार के नेतृत्व वाली सरकार को उखाड़ फेंका गया और लेनिन और बोल्शेविक सत्ता में आए। रूस को अब सोवियत संघ कहा जाता था और जोसेफ स्टालिन सरकार में एक प्रमुख नेता थे।

लेनिन और स्टालिन के बीच में एक बात दोनों को अलग करते थे।  स्टालिन प्रॉब्लम का समाधान करने के लिए प्रॉब्लम बाहर करने वाले आदमी को ही मरवा देते थे वह कहते थे वन मैन वन प्रॉब्लम, नो मैन नो प्रॉब्लम यह तरीका लेनिन को पसंद नहीं था।

स्टालिन बहुत चालाक और क्रूर किस उम्र के थे। अपने दुश्मनों को कभी नहीं छोड़ते थे। बड़े ही चालाकी से अपने शत्रुओं को मरवा देती थे। और सारे इल्जाम किसी और के ऊपर डाल देते थे।

व्लादीमीर लेनिन मरते समय एक बार कहे थे – रसिया के लोग स्टालिन को सत्ता में मत आने दो, यह सब को मार देगा।

कहा जाता है कि स्टालिन व्लादीमीर लेनिन की पत्नी को भी धमकी दी थी कि ‘तुम मेरे रास्ते में मत आओ अपने काम में काम रखो, वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा’। उस समय लेनिन की पत्नी एक अच्छे पद में थी। उन्होंने भी कहा आज तक मुझसे कोई इस तरह बात नहीं किया है।

व्लादिमीर लेनिन की मृत्यु हो गई। स्टालिन 1922 से कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव थे। वह सत्ता और नियंत्रण में बढ़ रहे थे। लेनिन की मृत्यु के बाद, स्टालिन ने सोवियत संघ के एकमात्र नेता के रूप में पदभार संभाला।

स्टालिन की हत्या और क्रूरता

स्टालिन विश्व इतिहास के सबसे क्रूर नेताओं में से एक थे। हिटलर भी इससे डरता था। कोई भी उससे सहमत नहीं होता तो उसे मरवा देता था। अपने देश की कुछ क्षेत्रों में अकाल का कारण भी बना ताकि जिन लोगों को वह मरवाना चाहते थे वह भूखे मर जाए। वह अपने शासनकाल के अंदर उसकी घटनाओं को अंजाम दिया जिसमें बहुत सारे लोगों के मरने की पूरी संभावना थी।

उनके शासनकाल में लाखों लोग मारे गए और बहुत सारे लोगों को दास श्रमिक शिविर में डाल दिया गया. इतिहासकारों को भी यकीन नहीं है वह कितने लोगों को मरवा दिया था लेकिन उनके अनुमान 20 से 40 मिलियन के बीच होगा.

जोसेफ स्टालिन की मृत्यु

5 मार्च, 1953 को मास्को में जोसेफ स्टालिन का निधन हो गया।

युवती दोस्तों स्टालिन की जीवन परिचय बारे में एक छोटी सी जानकारी । आशा करता हूं आपको यह आर्टिकल पसंद आई होगी

Categories: BIOGRAPHY

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