सुकरात के जीवन परिचय | Biography of  Socrates in Hindi

Published by Dakshya on

यूनान की एक महान दार्शनिक सुकरात जो दुनिया का सबसे प्राचीन विचारक माने जाते हैं। वह प्राचीन ग्रीस में जन्म हुए थे और आपने अमूल्य विचार से ग्रीक की जनता को आंदोलित किए थे। इसलिए उन्हें पश्चिमी विचारों का जनक भी कहा जाता है। तो चलिए जानते हैं सुकरात के जीवन परिचय (Biography of  Socrates in Hindi) के बारे में ।

सुकरात के जीवन परिचय

सुकरात की सटीक  जन्मतिथि नहीं है जो भी है वह अनुमानित जन्म तिथि है। बहुत ज्यादा लिखते नहीं थे लेकिन ज्यादा बोलते थे इसीलिए उन्होंने अपनी जीवन के बारे में कुछ लिखा ही नहीं, जो भी है उनके शिष्यों के द्वारा लिखी गई तथ्यों के अनुसार समझा जा सकता है। उनके अनेक शिष्य थे उनमें से एक है महान दार्शनिक प्लेटो (Plato)

सुकरात के जन्म 470 ईसा पूर्व से 469 ईसा पूर्व के बीच में हुआ था। उनका जन्म एथेंस के एक शहर एलोपेस में हुआ । वह एक गरीब परिवार में जन्मे थे । उनके पिता का नामसोफ्रोनिस्को है जो एक शिल्पी कार यानी कि एक मूर्तिकार थे और उनकी मांता का नाम  फेनारेटा था ।

सुकरात को लोग एक सूफी संत मानते थे और वह सूफियों की तरह साधारण शिक्षा और मानव सदाचार के ऊपर गुरुत्व देते थे । वह अपने जीवन में केवल ज्ञान प्राप्ति और ज्ञान की प्रसार करना ही उनका जीवन का लक्ष्य था । वह घर-घर घूम के गली गली घूम के अपनी अमूल्य विचारधारा से प्राचीन युग में क्रांति ला दी थी। सुकरात अपनी मातृभाषा शिक्षा, यूनानी कविताएं, भूगोल विज्ञान तथा गणित शिक्षा प्राप्त की थी ।

पारिवारिक जीवन


सुकरात अपने जीवन  में बहुत गरीबी देखे हैं । वह एक गरीब परिवार से थे , उनकी शादी Xanthippe नामक एक लड़की से हुई थी और उनके तीन बच्चे थे,  उनके नाम Lamprocles , sophroniscus और Menexenus तीनो के तीनो बेटे के रूप में जन्मे थे ।

Socrates अपने जीवन में अपने देश के लिए एक सैनिक के रूप में भी काम किए थे। सुकरात एक गजब के फिलोसोफर थी , उन्हें विचारधारा के ऊपर काफी लगाव था । परिवार के प्रति उनका लगाओ नहीं था इसलिए वह अपने परिवार को छोड़ दिए थे और ज्ञान की खोज और प्रसार करने लगे। वह राजा के नियम के विरोध में तर्क वितर्क करते रहते थे।

सुकरात की वैवाहिक जीवन अच्छा नहीं था यानी कि उनकी पत्नी के साथ हमेशा अन बंध चलता रहता था। पति पत्नी खुश नहीं थे। उनके जे पत्नी थी वह अच्छी नहीं थी हमेशा दोनों लड़ते झगड़ते रहते थे, यह सभी बात सुकरात ने कही है।

एक बार  एक लड़का सुकरात को पूछने आया कि मैं  विवाह करना चाहता हूं क्या विवाह करना सही होगा? सुकरात ने इसकी जवाब देते हुए कहा कि-  “हां, तुम्हें शादी करना चाहिए लेकिन पत्नी से ही मिल गई तो तुम सुख में जीवन बताओगे यदि पत्नी से ही ना मिली तो मेरे जैसे दार्शनिक बन जाओगे”

सुकरात अपने पारिवारिक जीवन में खुश नहीं थे। इस कारण से वह अपने परिवार को छोड़कर एक दार्शनिक जीवन बिताने के लिए चले गए । वह शिक्षा को जोर देने लगे।

प्राचीन एथेंस की धार्मिक स्थिति


उस समय एथेंस में परिस्थिति  सुविधाजनक नहीं था । राजा रूढ़ीवादी थे । राजा तथा शासक रूढ़िवादी हेतु वह आसमान के तारा (Star) को और सूरज (Sun) को भगवान के रूप में मानते थे। यह गलत बात नहीं थी लेकिन किसी को जोर जबरदस्त इनको ही पूजा करना है बोलकर उसके ऊपर थोपना यह गलत था। 

कोई भी राजा के ऊपर आवाज उठा नहीं सकता था, जो भी इसके ऊपर आवाज उठाता था राजा तथा शासक उसको कड़ी से कड़ी दंड देते थे इसलिए कोई भी उस समय आवाज उठाने के लिए डरता था लेकिन सुकरात ऐसे नहीं थे, वह इसके ऊपर आवाज उठाने लगे.

सुकरात आने वाली पीढ़ी के लिए क्रांति लेकर आए थे, वह क्रांति किसी हिंसा तथा हत्यारों से नहीं की गई थी बल्कि यह क्रांति था एक दार्शनिक विद्रोही का । सुकरात गली गली घूम के लोगों को ज्ञान बांटते रहे और अपने अमूल्य विचारों से युवाओं के मन में एक नई सोच पैदा किए। युवाओं को अच्छे और बुरे का समझ दिलाया . अनीति के खिलाफ आवाज उठाना सिखाया.

सुकरात के अमूल्य विचार

दुनिया में सबसे समझदार इंसान वह है, जो ये
जानता है कि मैं कुछ भी नहीं जानता

न्याय से पहले कुछ भी पसंद नहीं किया जाना चाहिए

मैं किसी को कुछ भी नहीं सिखा सकता,
मैं केवल उनकी सोच बदल सकता हूँ।

खुद को खोजने के लिए, अपने लिए सोचो

अभिमान मनुष्य को बांटता है, विनम्रता मनुष्य को जोड़ती है

सुकरात के जीवन से जुड़ी हुई एक छोटी सी किस्सा आज हम आपको सुनाने वाले हैं . उनके विचारों के अलावा उनकी एक छोटी सी घटना है आपको बहुत कुछ शिखा जाएगी।

एक बार वह बाजार से गुजर रहे थे और उनकी मुलाकात एक व्यक्ति के साथ हुई. उस व्यक्ति ने सुकरात को कुछ बताना शुरू किया – मैं आपको बहुत ही मजेदार बात बताने वाला हूं क्या आप जानते हैं कि कल आपका एक मित्र आपके बारे में क्या कह रहा था.  सुकरात ने उस व्यक्ति को रोकते हुए कहा – मैं आपकी बात सुनुंगा पहले मेरे 3 सवाल का जवाब दो, इनमें से एक भी सवाल सही होगा तो मैं आपकी बात पूरी तरह सुनुंगा-
क्या वह बात पूरी तरह सही है जो बात तुम बताना चाहते हो-
• जवाब में – नहीं,  अभी मैंने यह बात केवल सुनी है

क्या आप ऐसा कहना चाहते हो जो मेरे लिए  अच्छा या दयालु है?
• जवाब में – नहीं

क्या वह बात मेरे लिए काम की है?
• जवाब में – नहीं

ये सब सुनने के बाद सुकरात ने उस व्यक्ति की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए कहा जो बात मेरे मित्र के बारे में आप बताना चाहते हैं वह बात पूरी तरह सत्य नहीं है, मेरे अच्छे के लिए भी नहीं है, और वह बात मेरे कुछ काम की भी नहीं है तो मैं वह बात क्यों सुनू ..

सुकरात के अंतिम जीवन


सुकरात एक शिक्षक थे, वह लोगों को गली-गली, गांव-गांव घूम के शिक्षा प्रदान करते थे । अच्छे बुरे के बारे में समझाते थे, तर्क वितर्क करने की चिंता लोगों के अंदर जगाई थी। उस समय राजा का शासन निरंकुश था, राजा तथा शासक उन्हें विष का प्याला पीला के मृत्यु दंड की सजा सुनाई थी । 399 ईसा पूर्व में सुकरात को मृत्युदंड दिया गया था, उस समय उनका आयु लगभग 71 वर्ष था .

Credit by:- STUDY IQ

सुकरात को मृत्यु दंड क्यों हुई थी

सुकरात कि समय ग्रीक समाज के लोग बहुत ही देव वादी  थे.  कहते थे कि दुनिया में बहुत सारे भगवान है इसमें सुकरात कहते थे कि भगवान होगा तो वह एक से ज्यादा नहीं होगा और वह तर्क के माध्यम से इस बात को पूरी तरह खारिज किया कि ग्रीक समाज में चल रही धार्मिक विचार  यानी कि जो ग्रीक मैथोलॉजी में उस समय चल रहा था उसे खारिज किया।

सुकरात को बहुत लोग पसंद करते थे उनके बाणी उनके विचारों को लोग बहुत सुनना पसंद करते थे, वह दिखने में सुंदर नहीं थे लेकिन उनके विचारों में काफी वजन था जिससे लोग उनकी तरफ आकर्षित हुए थे।

सुकरात गली गली घूम के लोगों को विचारो के ऊपर तर्क करने के लिए कहते थे, सत्य की संधान करने के लिए कहते थे। इस कारण से राजा काफी घबरा गए थे ऐसे ही चलता रहा तो 1 दिन आएगा सुकरात सारे लोगों को अपने तरफ कर लेगा सभी को भड़का के  पूरी तरह ग्रीक माइथॉलजी को और शासन व्यवस्था को तर्क वितर्क माध्यम से पूरी तरह खारिज कर देगा। उसके तर्क के सामने कोई टिक नहीं पाएगा।

इसी बात को देखते हुए राजा   युवाओं को भड़काने और देशद्रोही के रूप में सुकरात को मृत्युदंड की सजा सुनाया था जो देखा जाए तो सुकरात के प्रति सही नहीं था लेकिन सुकरात इसे हंसते-हंसते स्वीकार कर लिए थे । उन्हें जहर का प्याला पीने का मृत्यु दंड दिया गया था।

सुकरात पर आरोप

399 ईसा पूर्व में  सुकरात के दुश्मनों ने सजा दिलवाने के लिए उसके ऊपर कुछ आरोप लगाया था। उन्होंने सुकरात पर मुक़दमा चलवा दिया था। सुकरात पर मुख्य रूप से तीन आरोप लगाये गए थे-

  •  प्रथम आरोप यह थाकि वह देवताओं  की उपेक्षा  करता है और  उनमे  विश्वास नहीं करता।
  •  दूसरी आरोप यह लगाया गया कि उसने  माननीय  देवताओं  के  स्थान  पर कल्पित जीवन देवता को स्थापित किया है।
  •  तीसरा आरोप था कि वह नगर के  युवाओं को  भड़का रहा है और उन्हें भ्रष्ट कर रहा है।

उनके जो मित्र और शिष्य थे वह लोग नहीं चाहते थे कि सुकरात की ऐसे मौत हो, उन्हें बचाने के लिए काफी कोशिश किए थे एक बार सारा व्यवस्था हो गया था प्लेटो अपने कुछ दोस्तों के साथ सुकरात के पास आया और कहा कि “आप यहां से भाग जाइए हमने सारी व्यवस्था कर दी है ” लेकिन सुकरात चाहते तो भाग सकते थे लेकिन वह नहीं भागे वह कहे कि “यदि मैं भाग गया तो पीछे मेरा विचार मर जाएगा यदि मैं यहां रहा तो मेरा शरीर मर जाएगा और दोनों में से एक को चुनना हो तो मैं मरने के लिए अपना शरीर को चुनूंगा” ।  प्लेटो निराश होकर वहां से लौट गए थे। प्लेटो अपनी पुस्तक  रिपब्लिक में यह घटनाएं उल्लेख कीए है।

निष्कर्ष


सुकरात अपने जीवन काल में एक ही पुस्तक नहीं लिखे फिर भी वह आज दुनिया को अपनी विचार से शिक्षित कर रहे हैं। सुकरात के अनुयायीओं में बहुत युवाओं रहे थे। प्लेटो उनके  बड़े शिष्य थे । सुकरात के जीवन के बारे में उनके विचारों के बारे में ज्यादातर उनकी शिष्यों  की लिखी गई दस्तावेजों से जानी जाती है।


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