Ajit Doval Biography in Hindi | अजीत डोभाल जीवन परिचय | भारत के जेम्स बॉन्ड

Published by Jitu on

हेलो दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं भारत के एक  ऐसे जासूस के बारे में इसके आगे जेम्स बांड भी फीका पड़ जाए जी हां हम बात करने वाले हैं भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बारे में. अजीत डोभाल के जीवन परिचय के बारे में आज हम जानेंगे।

अजीत डोभाल के जीवन परिचय ( Ajit Doval Biography in Hindi)

आप फिल्मों में तो बहुत सारे हीरो को देखे ही होंगे लेकिन कभी रियल लाइफ के हीरो को देखा है। हमारे देश के जेम्स बॉन्ड, जी हां दोस्तों अभी जेम्स बॉन्ड काल्पनिक चरित्र नहीं रह गया है असली के जेम्स बॉन्ड अजीत डोभाल, 21 वी सदी के चाणक्य, बुद्धि के राजा, अजीत डोभाल के नाम पर दुश्मन देश थरथरा कांपते  हैं। वह भारत के प्रधान मंत्री के 5 वें और वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के रूप में स्थित है।

इंटेलिजेंस कम्युनिटी मे अजीत डोभाल एक अर्जेंट है और उन्होंने मिजो विद्रोह और कंधार से IC- 814 विमान की बंधकों की रिहाई जैसे जटिल से भी जटिल मुद्दों को भी संभाला है। कई मायनों में, वह सर्वोत्तम आउट-ऑफ-द-बॉक्स सोचते  हैं।

अजीत डोभाल जीवन परिचय (Biography of Ajit doval in Hindi)

अजीत डोभाल का जन्म 20 जनवरी 1945 में तत्कालीन संयुक्त प्रांत, अब उत्तराखंड में पौड़ी गढ़वाल के गिरि बनेल्स्युन गांव में हुआ था। डोभाल के पिता मेजर जी. एन. डोभाल भारतीय सेना में अधिकारी थे।

शिक्षा जीवन

अजीत डोभाल ने अपनी स्कूली शिक्षा अजमेर, राजस्थान में किंग जॉर्ज के रॉयल इंडियन मिलिट्री स्कूल ( अभी के समय- Ajmer Military School) से की थी। 1967 में आगरा विश्वविद्यालय से उन्होंने अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन की उपाधि प्राप्त की । दिसंबर 2017 में, डोभाल को आगरा विश्वविद्यालय से विज्ञान में मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया था।

अजीत डोभाल के संक्षिप्त जीवन परिचय

जन्मदिन20 जनवरी 1945
उम्र73
पेशा5th राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (भारत)
सैलरीUD$= 2400 ( लगभग ₹177315
पत्नीअनु डोभाल
बच्चे शौर्य डोभाल ( बेटा),
विवेक डोभाल ( बेटा)
पितागुणनाद डोभाल
माताअभी तक अपडेट नहीं किया गया
धर्म हिंदू
गढ़वाल (ब्राह्मण)
राशि कुंभ राशि
राष्ट्रीयता भारतीय

अजीत डोभाल कैरियर

वैसे तो अजीत डोभाल जी ने अपने करियर की शुरुआत केरला के आईपीएस के रूप में शुरू किया था उनका कार्य करने की तरीके और लगन को देखकर आज वह भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त है। उनकी आयु 73 वर्ष अब तक हो चुकी है। उनके करियर के बारे में पूरी डिटेल में इस तरह जानेंगे-

IPS KERALA – केरला में आईपीएस की नौकरी की

डोभाल 1968 में केरल कैडर में भारतीय पुलिस सेवा में कोट्टायम जिले के IPS के रूप में शामिल हुए। … डोभाल ने केंद्रीय सेवा में शामिल होने से पहले, 1972 में कुछ महीनों के लिए केरल के थालास्सेरी में काम किया था।

Director of the IB (2004-05) – इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर रहे

अजीत डोभाल 1968 में केरल कैडर से IPS में चुने गए थे और साल 1972 में भारत की खुफिया एजेंसी आईवी में जुड़े थे, इसी दौरान 7 साल वह खुफिया एजेंट के रूप में पाकिस्तान में रहे थे। 2004-05 में इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी IB के चीफ के पद संभाले और 2005 में रिटायर हो गए। वह सक्रिय रूप से मिजोरम, पंजाब और कश्मीर में उग्रवाद विरोधी ऑपरेशन में शामिल रहे हैं।

Mizoram Peace Accord (1986) – मिजोरम शांति समझौता में भूमिका।

मिजोरम आर्म लेफ्ट फ्रंट (Malf) अलगाववादियों का एक संगठन था, जिसका नेतृत्व लालडेंगा ने किया था। भारत से आजादी के लिए अर्थात यह संस्था यह चाहता था कि भारत से अलग होकर एक नई देश गठन करना। भारत से अलग होकर अपनी खुद की सरकार बनाने के लिए दाबी करते थे। इस कारण से भारत में कई तरह से आतंकवादियों की गतिविधि दिखाई दे रहा था। फिर इन परिस्थिति को देखकर आईवी (IB) डिपार्टमेंट अजीत डोभाल को मिजोरम भेजा वहां की परिस्थिति का जायजा लेने के लिए.

अजीत डोभाल malf के लीडर लालडेंगा से जाकर बात की जो एक कुख्यात आतंकवादी था। निडर होकर आतंकवादियों के सामने जाकर अजीत डोभाल ने शांति समझौता करने के लिए मजबूर किया  था जिसे मिजोरम शांति समझौता-1986 कहते हैं

मिजोरम आर्म लेफ्ट फ्रंट मैं 7 कमांडर थे जिनमें से एक था लालडेंगा, इन सभी से बातचीत के दौरान अजीत डोभाल ने 6  कमांडर को अपने विश्वास ने लिया इससे लाल लेना कमजोर पड़ गया और उसके पास भारत सरकार से समझौता करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा। अजीत डोभाल अपनी बुद्धि और चतुराई से शांति पूर्ण रूप से यह समझौता करवाया था।

मिजोरम शांति समझौता, 1986 भारत सरकार और मिजो नेशनल फ्रंट के बीच मिजोरम, भारत में उग्रवाद और हिंसा को समाप्त करने के लिए एक आधिकारिक समझौता था.

Operation Black Thunder-II (1988) – ऑपरेशन ब्लैक थंडर में अहम भूमिका

जी हां दोस्तों हम बात करने वाले हैं ऑपरेशन ब्लैक थंडर और ऑपरेशन ब्लू स्टार यह, नाम तो आपने सुना ही होगा क्या ऑपरेशन भारत के सेना द्वारा चलाई गई ऑपरेशन था – जब खालिस्तानी आतंकवादियों ने अमृतसर की गोल्डन टेंपल को कब्जा कर लिया था. इन आतंकवादियों ने स्वर्ण मंदिर की गुरुद्वारे को काफी नुकसान पहुंचाया था।

आपको जानकर हैरान होगा कि अजीत डोभाल इस समय एक रिक्शावाला बने हुए थे और अमृतसर में जा घुसे थे। वहां की इर्द-गिर्द घूमते रहते थे वहां की परिस्थिति का जायजा लेने के लिए लेकिन इस तरह रोज रोज घूमने के कारण आतंकवादियों को उनके ऊपर शक हो गया और उन्हें पकड़ लिया गया।

आतंकवादियों के द्वारा पकड़े जाने के बाद अजीत डोभाल ने अपनी बुद्धि और चतुराई दिखाई और आतंकवादियों को बतलाया की मैं आई. एस. आई का एजेंट हूं आपको मदद करने आया हूं , उन्होंने अपनी बातों से खालिस्तानी आतंकवादियों को विश्वास दिलाया, इस तरह अजीत डोभाल 3 दिन तक उन आतंकवादियों के साथ रहे , उनकी सारी जानकारी जुदाई और इंडियन आर्मी के ब्लैक कैट कमांडो को पूरा प्लान समझा दिया. तब आरंभ हुआ ऑपरेशन ब्लैक थंडर, इस ऑपरेशन से अमृतसर को आतंकवादियों से छुड़ा लिया गया ।

Kirti Chakra -1988 – कीर्ति चक्र से सम्मानित

कीर्ति चक्र भारत का शांति के समय वीरता का पदक है. यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण समय वीरता  या बलिदान के लिए दिया जाता है. अजीत डोभाल भारत के इकलौते ऐसे नौकरशाह हैं जिन्हें कीर्ति चक्र और शांतिकाल में मिलने वाले गैलेंट्री अवॉर्ड से नवाजा गया है। साल 1988 में इन्हें दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरुस्कार कीर्ति चक्र दिया गया था. उससे पहले पुलिस सेवा में 6 साल के अंदर ही पुलिस पदक पाने वाले युवा पुलिस ऑफिसर थे ।

IC-814 Hijack to Kandahar- 1999 – हाईजैक विमान उद्धार में अहम भूमिका

यह विमान हाईजैक घटना 1999 को हुआ था. कुछ पाकिस्तानी आतंकवादियों ने भारतीय विमान IC-814 को नेपाल के काठमांडू से हाईजैक कर लिया था। उस विमान में 176 भारतीय यात्री थे, इस विमान को दिल्ली आना था  . विमान को हाईजैक करके आतंकवादियों ने विमान को काठमांडू से अमृतसर, अमृतसर से लाहौर ले गए थे फिर रात होने की वजह से लाहौर से दुबई ले गए थे, वहां से ले गए अफगानिस्तान के कंधार हवाई अड्डा में. वहां सभी यात्रियों को बंधक बना लिया गया ।

पायलट की सूझबूझ से विमान को एक बार अमृतसर में लाया गया था लेकिन यात्रियों को आतंकवादियों से छुड़वाने में भारतीय सरकार नाकाम रही। कंधार एयरपोर्ट पहुंचने के बाद यात्रियों की रिहाई के बदले आतंकवादियों ने तीन खूंखार आतंकवादी को छोड़ने की मांग की । भारत की जेल में पढ़ें तीन खूंखार आतंकवादी को यात्रियों की रिहाई के बदले छोड़ना पड़ा था ।

आतंकवादियों ने अपनी तीन खूंखार आतंकवादी को छुड़ा ले गए थे और यह विमान हाईजैक में रुपिन कटियाल (Rupin Katyal) नामक एक यात्री की जान चली गई थी।

इस विमान को छुड़ाने के लिए आतंकवादी के साथ नेगोशिएट करने के लिए अजीत डोभाल ही गए थे

Vivekananda international foundation- 2009 – विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय फाउंडेशन

विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन कन्याकुमारी में स्थित विवेकानंद केंद्र का एक हिस्सा है जिसकी स्थापना एकनाथ रानाडे ने की थी। अभी के समय में यह संस्था पड़ोसी देशों से संबंध और रणनीति के मामले में सरकार को सलाह देता है ।

इसे भी पढ़ें


0 Comments

Leave a Reply

Avatar placeholder

Your email address will not be published.