एफएटीएफ (FATF) क्या है ? ग्रे लिस्ट, ब्लैक लिस्ट क्या है? पूरी जानकारी इन हिंदी ।

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 हेलो दोस्तों आज हम इस लेख जानेंगे एफएटीएफ क्या है? इसे क्यों बनाया गया था और FATF किसी देश को किस तरह से दंड देती है। एफएटीएफ के ग्रेलिस्ट क्या है?  ब्लैक लिस्ट क्या है? विश्व में इस लिस्ट का महत्व क्या है? इस बारे में पूरी जानकारी देंगे । मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी फंडिंग इन चीजों को किस तरह से FATF हैंडल करती है आज हम इस लेख में जानेंगे।

एफएटीएफ(FATF) की संक्षिप्त परिचय

  • स्थापना – सन 1989 
  • प्रकार –      अंतर सरकारी संगठन
  • उद्देश्य –      मुकाबला मोनी लॉन्ड्री और टेरर फंडिंग
  • मुख्यालय – पेरिस , फ्रेंड्स
  • सदस्य –      39 ( 37- देश, 2- संगठन )
  • बैठक –       फेब्रुअरी, जून, अक्टूबर
  • अधिकारी भाषा –   इंग्लिश और फ्रेंड्स

एफएटीएफ (FATF) क्या है ?

एफएटीएफ एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो मनी लॉन्ड्रिंग अर्थात काले धन को वैध बनाने और टेरर फंडिंग को रोकने के लिए G7 द्वारा बनाया गया एक अनुष्ठान है। इस संस्था की नजर आर्थिक रूप  से दुनिया के सारे देशों के ऊपर रहती है । यह संस्था काले पैसे को सफेद बनाने और आतंकवाद को आर्थिक रूप से बढ़ावा देने बाली गतिविधि को रोकने और संबंधित देश को सलाह देने का काम करती है। FATF इन कार्यों को नजर रखते हुए तीन लिस्ट ( ग्रीन लिस्ट, ग्रे लिस्ट, ब्लैक लिस्ट) जारी करती है और दुनिया की देशों को इन 3 लिस्ट में से किसी एक में रखती है।


साधारण रूप से बोला जाए तो एफएसडीए दुनिया के सारे देशों की आर्थिक गतिविधि के ऊपर  नजर रखती है। जिससे विश्व में आर्थिक अपराधों को रोका जा सके। आर्थिक अपराध अर्थात वित्तीय अपराध को रोकने के लिए FATF विभिन्न  नियम कानून बनाती है। उनके बनाए गए नियम कानून के अनुसार सारे देश कार्य करना चाहिए वरना जो देश इस नियम का पालन नहीं करता वह देश को FATF ग्रे लिस्ट अथवा ब्लैक लिस्ट में डाल देती है। जो देश ग्रे लिस्ट अथवा ब्लैक लिस्ट में आती है दुनिया की नजर में अच्छी मानी नहीं जाती इसका अर्थ है वह देश शायद मनी लॉन्ड्रिंग या टेरर फंडिंग गतिविधि को बढ़ावा देता होगा। अभी सवाल उठता है मनी लांड्रिंग और टेरर फंडिंग क्या है ?

मनी लांड्रिंग क्या है ?

मनी लांड्रिंग क्या है जानने से पहले हमें काला धन क्या है उस बारे में जानना जरूरी है। काला धन क्या है– जिस पैसे में यदि सरकार को टैक्स नहीं दिया गया उस पैसे को काला धन कहते हैं । भारत में  सालाना 5 लाख से ऊपर कमाने वाले लोगों को ही ज्यादा इनकम टैक्स लगता है । अभी money-laundering क्या है- उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति के पास 10 करोड़ों अवैध धन (Black money) है अर उसे वैध बनाने के लिए जो प्रक्रिया चलती है उसे ही कहते हैं मनी लॉन्ड्रिंग । ज्यादातर अवैध धन विदेशों में भेज दिया जाता है और उस पैसे को अन्य तरीकेेेेे से वापस फिर से लाया जाता है इस प्रक्रिया को ही कहतेे हैं मनी लांड्रिंग ।

टेरर फंडिंग क्या है ?

आतंकवादी को आर्थिक सहायता देना ही टेरर फंडिंग कहलाता है। किसी भी आतंकवादी संस्था का इनकम स्रोत नहीं होता उसे कोई ना कोई तो पैसा देता होगा, उन्हें कोई आर्थिक सहायता करता होगा इसे ही कहते हैं टेरर फंडिंग।


आसान भाषा में कह तो – किसी भी देश या दुनिया के लिए आतंकवाद से लड़ना उनसे जुजना हमेशा से ही परेशानी की बात रही है। कभी भी कहीं आतंकी घटना होती है तो उस घटना में बड़े पैमाने पर एक से बढ़कर एक हत्यार प्रयोग की जाती है। जितने भी आतंकी घटना से पहले आतंकवादी के पास बड़े ही आराम से जरूरत की सामान मिल जाती है चाहे वह कैसा हो , टेक्नोलॉजी हो या फिर आधुनिक हथियार । यह सब बड़े आराम से मिल जाती है। अभी सवाल उठता है कि इन सारी चीजें आतंकवादियों के पास कैसे आसानी से आ जाती है , कैसे आसानी से मिल जाती है ? इन सारी चीजों के लिए फंडिंग कहां से आती है उसके ऊपर नजर रखने का काम करती है FATF .

FATF का फुल फॉर्म

  • FATF Full Form in Hindi  – Financial Action Task Force (FATF)
  • एफएटीएफ फुल फॉर्म इन हिंदी– वित्तीय करवाई टास्क फोर्स

एफएटीएफ का स्थापना कब हुआ?

साल 1989 के पहले की बात है तब दुनिया में आतंकवाद का हमला सर चढ़कर बोल रहा था, उस समय उस समस्या का कोई समाधान नहीं था । इन सारी घटनाओं के ऊपर किस तरह से रोक लगाई जाए इस बारे में सभी देश विचार कर रहे थे, इस तरह से समय बीतता गया फिर समय आया 14 से 16 जुलाई 1989 में G7 की 15 वे सम्मेलन में इस समस्या का समाधान खोजा जाने लगा । आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए G7 ने एक समाधान निकाला और समाधान यह था कि आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने के लिए जो भारी-भरकम पैसा  आती है उस आने वाले स्रोत पर रोक लगा दे तो कुछ हद तक आतंकवादी हमला को रोक सकते हैं । इसलिए G7 ग्रुप के लोगों ने FATF नामक एक संस्था बनाएं है । एफएटीएफ में कम्युनिकेट करने के लिए 2 भाषा है इंग्लिश और फ्रेंच भाषा ।


G7 क्या है?G7- GROUP OF SEVEN- अमेरिका, फ्रांस, जापान, कनाडा इटली, यूके, जर्मनी इन 7 देशों को कहते हैं G7 जो दुनिया की सबसे तेज इकोनॉमी मानी जाती है यानी कि आर्थिक रूप से यह देश काफी विकसित  है। इन देशों ने दुनिया में बढ़ती मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को रोकने के लिए ही एफएटीएफ(FATF)  नामक संस्था बनाया था। फ्रांस में इस संस्था को कहते हैं GAFI जिसका मतलब है GROUP E D’ACTION FINANCIARE . यह एक इंटर गवर्नमेंटल संस्था है अर्थात बहुत सारे देशों की सरकार मिलकर यह संस्था बनाए हैं। 


एफएटीएफ का बैठक कब होता है?

साल में 3 बार एफएटीएफ की बैठक होती है। फेब्रुवारी, जून अक्टूबर इन महीने में  बैठक बैठती है और मनी लॉन्ड्रिंग टेरर फंडिंग के साथ-सथ ग्रेे लिस्ट में रहने वाले देशों की चर्चा की जाती है। FATF का  मुख्यालयों फ्रांस के पेरिस शहर में है।

एफएटीएफ का सदस्य संख्या

वर्तमान के समय में एफएटीएफ के कुल 29 सदस्य हैं जिनमें से 27 देश है और 2 संगठन शामिल है। यह संगठन है- यूरोपियन कमीशन (European Commission) और गल्फ ऑफ को-ऑपरेशन कौंसिल (Gulf Co-operation Council) । भारत भी इस  संस्था का एक सदस्य है ।

एफएटीएफ का क्या-क्या कार्य है

वैसे तो वर्तमान में FATF का बहुत सारे कार्य है उनमें से जो प्रधान कार्य है उस बारे में जानेंगे। एफएटीएफ ज्यादातर आर्थिक दृष्टिकोण से अपना कार्य संपादन करती है । मोटा मोटी हिसाब से उसका पांच मुख्य कार्य है।


1. अंतरराष्ट्रीय वित्तीय समस्या को खोज के उसको एनालाइज करना।


2. एफएटीएफ काले धन को सफेद करने से रोक लगाने वाले और आतंकवाद फैलाने से रोक लगाने वाले नियम कानून बनाने का काम करती है।


3. एफएटीएफ अपने बनाए नियम कानून को पूरी दुनिया में प्रमोट करती है।


4. एफएटीएफ अपने सदस्य देशों के ऊपर निगरानी रखती है और एफएटीएफ द्वारा बनाई गई नियम कानून का पालन हो रहा है या नहीं उस पर नजर रखती है।


5. एफएटीएफ आप अपने सदस्य देशों के ऊपर नजर रखने के साथ-साथ दुनिया की कौन-कौन सी देश मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग कार्य करने में संबंधित संदेह है। उस देश को अपने बनाए हुए लिस्ट  के आधार पर दंड देती है।

एफएटीएफ ग्रीन लिस्ट क्या है ?

इस सूची में रहने वाले देशों को आर्थिक रूप से कोई प्रॉब्लम नहीं होता। कोई भी संस्था आसानी से इस लिस्ट में रहने वाले देशों को लोन दे सकती है।  FATF द्वारा बनाई गई कानून की अनुसरण करने वाले देश को इस सूची में रखी जाती है। इस देश को कोई भी संस्था या देश आराम से लोन दे सकती है इसमें कोई दिक्कत नहीं होगी । यह सूची के देश FATF के नजर में काफी अच्छी मानी जाती है। जिससे यह देश की छवि पूरी दुनिया में अच्छी मानी जाती है । इसके कारण उस देश की आर्थिक स्थिति उन्नत होती है उस देश की JDP पड़ती है और आर्थिक रूप से बहुत सारी सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। कोई भी देश इस लिस्ट में रहने वाले देश के साथ व्यापार करने में संकोच नहीं करती।

एफएटीएफ ग्रे लिस्ट क्या होता है?

ग्रे लिस्ट में रहने वाले देशों को चेतावनी दी जाती है कि आप अपने देश में होने वाले मनी लांड्रिंग और टेरर फंडिंग वाली गतिविधि को रोकने के लिए कड़े से कड़े कदम नहीं ले रहे हैं। जिससे दुनिया में मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग वाली गतिविधि बढ़ती है तो उन देश को कहा जाता है कि बड़े से बड़े कदम उठाकर इन सारी समस्या को सख्त से निपटने के लिए चेतावनी दी जाती है नहीं तो ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा।


कोई भी देश में सही कानून नहीं होने से उस देश में टैक्स चोरी होती है । टैक्स चोरी पैसे को कहते हैं काला धन, उस काला धन को मनी लॉन्ड्रिंग के रूप में विदेश भेज दिया जाता है और उस पैसे को टेरर फंडिंग के रूप में उपयोग किया जाता है। इन सारी गतिविधियों को रोकने में  सक्षम नहीं होने वाले देशों को ग्रे लिस्ट में डाल दिया जाता है उसके बाद एफएटीएफ उस देशों को उन बिंदुओं के बारे में सुधार करने के लिए एक लिस्ट भेजती है जिसे वह सुधार करना आवश्यक है । 


ग्रे लिस्ट में रहने वाले देशों के ऊपर एफएटीएफ की  निगरानी हमेशा रहती है। कुछ समय के बाद उस देश को फिर से समीक्षा की जाती है और देखी जाती है की वह कार्य पूरा हुआ कि नहीं। इस लिस्ट में रहने वाले देशों को किसी भी संस्था लोन नहीं देती यदि देते हो तो बहुत सारे समझौता के तहत देते है अर्थात जो देश ग्रेलिस्ट में है उसे लोन लेने में काफी दिक्कत आती है। उस देश को अंतरराष्ट्रीय व्यापार करने में भी काफी समस्या का सामना करना पड़ता  है । यह उनका सजा होता है ।

एफएटीएफ ब्लैक लिस्ट क्या होता है?

ब्लैक लिस्ट में उन देशों को रखा जाता है जो देश मनी लांड्रिंग और टेरर फंडिंग को बढ़ावा देते हैं यानी कि इन सारी गतिविधियों को रोकने में कोई कानूनी कदम नहीं उठाते । एफएटीएफ के द्वारा बनाई गई कानून को जो देश नहीं मानते उस देश को ब्लैक लिस्ट में रखा जाता है इसके अलावा जो देश ग्रेलिस्ट में होते हैं उसे कुछ सुधार करने के लिए एफएटीएफ कहता है।  एसएटीएफ कहने के अनुसार सुधार नहीं किए तो उन्हें ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाता है। 


ब्लैक लिस्ट में रहने वाले देश में कोई भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार नहीं होता। दुनिया की नजर में वह देश की छवि काफी गिरी हुई होती है। ना कोई देश उसके साथ व्यापार करता है ना कोई संस्था उसे लोन देता है। उस देश की आर्थिक स्थिति पूरी तरह नीचे चली जाती है। उस देश को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग नहीं मिलता। इसके कारण उस देश में आर्थिक संकट दिखाई देती है। उस देश में कोई निवेश नहीं करता। उस देश में बेरोजगारी संख्या बढ़ने लगती है। उस देश में गरीबी और भुखमरी जैसी परिस्थिति दिखने लगती है। यह उनका बहुत बड़ी सजा होती है।

आशा करता हूं मेरी ए आर्टिकल आपको पसंद आई होगी। इस आर्टिकल से आपको कुछ जानकारी मिली होगी तो जरूर कमेंट करके बताइएगा और उसके बारे में और कुछ जानते हैं तो भी हमें जरूर कमेंट करके बताइएगा ।


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